
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) 2030 तक लगभग 1000 J-20 माइटी ड्रैगन स्टील्थ फाइटर जेट्स को शामिल करने की राह पर है। रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (RUSI) और अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन की तेज उत्पादन क्षमता से यह लक्ष्य हासिल हो सकता है, जो इंडो-पैसिफिक में अमेरिका और उसके सहयोगियों के हवाई वर्चस्व को बड़ी चुनौती देगा।
J-20 चीन का पहला पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर है, जो रडार से बचने, लंबी दूरी की स्ट्राइक और उन्नत सेंसर से लैस है। वर्तमान में चीन के पास सैकड़ों J-20 हैं और उत्पादन दर बढ़कर सालाना 100-200 तक पहुंच गई है। इससे अमेरिका के F-22 (केवल 180-190) और F-35 के मुकाबले संतुलन बदल सकता है।
भारत के लिए प्रभाव:
- LAC पर चीन की बढ़ती ताकत से पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल में चुनौती बढ़ेगी।
- पाकिस्तान के साथ चीन का सहयोग (JF-17, J-10C आदि) मजबूत हो सकता है।
- भारत को अपनी वायुसेना मजबूत करने की जरूरत: AMCA, TEDBF, अधिक राफेल/सुखोई-30MKI अपग्रेड और तेज उत्पादन पर फोकस।



