
दिल्ली स्टैटिस्टिकल हैंडबुक 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी की 11.23 फीसदी आबादी विभिन्न मानसिक बीमारियों से प्रभावित है। इनमें 4.28 फीसदी लोग गंभीर बीमारियों जैसे अवसाद, चिंता और सिजोफ्रेनिया से पीड़ित हैं।
रिपोर्ट में दिव्यांगता के आंकड़े भी चिंताजनक हैं। करीब 7 फीसदी लोगों में बौद्धिक विकास की कमी है, जिससे सीखने और रोजमर्रा के कामों में दिक्कत आती है। आंखों की समस्या 12.83%, मूकबधिर 21.11% और शारीरिक गतिशीलता की कमी 28.69% लोगों में है। कुल दिव्यांगों की संख्या 2.34 लाख (कुल आबादी का 1.4%) है। ये आंकड़े 2011 जनगणना पर आधारित हैं, मौजूदा स्थिति और गंभीर मानी जा रही है।
मनोचिकित्सक डॉ. राहुल शर्मा के अनुसार, शहर की तेज रफ्तार, काम का दबाव, ट्रैफिक, प्रदूषण और कोरोना के बाद अकेलापन मुख्य कारण हैं। महामारी के बाद मामले 30-40% बढ़े हैं। डॉ. प्रिया मेहता ने महिलाओं में घर-नौकरी का बोझ और लिंग भेदभाव को बड़ा फैक्टर बताया। बच्चों में मानसिक रिटार्डेशन जेनेटिक, पोषण की कमी या जन्म जटिलताओं से होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित व्यायाम, अच्छी डाइट, योग और काउंसलिंग से इन समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। स्टिग्मा के कारण कई लोग इलाज नहीं कराते, जिससे समस्या बढ़ती है।

