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इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे सिर्फ मान्यता न होने पर बंद नहीं कर सकते, श्रावस्ती मदरसे की सील 24 घंटे में हटाने का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने श्रावस्ती जिले के एक गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे (मदरसा अहले सुन्नत इमाम अहमद रजा) पर लगी सील हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड से मान्यता न होने के आधार पर ही मदरसे को बंद या सील नहीं किया जा सकता। ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।

न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के 1 मई 2025 के बंद करने के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रमाणित आदेश की कॉपी मिलते ही 24 घंटे के अंदर सील हटा दी जाए। हालांकि, मदरसा सरकारी अनुदान, बोर्ड परीक्षा या सरकारी लाभ के हकदार नहीं होगा जब तक मान्यता नहीं मिलती।

प्रदेश में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद से करीब 16,460 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं। 2017 से नए मदरसों को मान्यता पर रोक है। 2024 के सर्वे में 8,449 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे/मकतब सामने आए, जिनमें से 4,204 को चिह्नित कर जिलों में कमेटियां बनाई गईं। नेपाल सीमा से सटे जिलों (श्रावस्ती, बहराइच, सिद्धार्थनगर) में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई, जहां 500 से अधिक मदरसे बंद किए गए।

मदरसा बोर्ड के पूर्व चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद और पूर्व सदस्य हाजी दीवान साहेब जमां खां ने कहा कि मानक पूरे करने वाले मदरसों को मान्यता देने के बजाय बंद करना गलत था। हाईकोर्ट के आदेश से अब ऐसे सैकड़ों मदरसों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

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