
उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा की पवित्रता और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के लिए एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय लिया है। इस वर्ष बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। इससे रील, व्लॉग और फोटोग्राफी के नाम पर होने वाले अनावश्यक विवादों पर लगाम लगेगी, और श्रद्धालु पूरी एकाग्रता व श्रद्धा से दर्शन कर सकेंगे।
क्यों लिया गया यह फैसला?
गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने शनिवार को ऋषिकेश स्थित चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में यह घोषणा की। बैठक में गढ़वाल आईजी राजीव स्वरूप सहित विभिन्न जिलों के जिलाधिकारी और अधिकारी मौजूद थे।
आयुक्त ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में मंदिर परिसरों में मोबाइल से रील और ब्लॉग बनाने के दौरान कई बार विवाद की स्थिति बनी, जिससे धामों की गरिमा प्रभावित हुई। दर्शन कतार में रुकावट और भीड़ प्रबंधन में असुविधा के कारण यह कदम उठाया गया है। यह फैसला आस्था और व्यवस्था दोनों का संतुलन बनाए रखने वाला बताया जा रहा है।
धाम-वार प्रतिबंध की मुख्य बातें
- बदरीनाथ धाम: सिंहद्वार से आगे मोबाइल फोन और कैमरा पूरी तरह प्रतिबंधित।
- केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री: मंदिर परिसर में मोबाइल फोन ले जाना बैन।
- श्रद्धालुओं को दर्शन से पहले अपने मोबाइल और कैमरे जमा कराने होंगे।
- श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) और जिला प्रशासन धामों के बाहर सुरक्षित क्लोक रूम व्यवस्था करेगा, जहां फोन जमा कराकर दर्शन के बाद वापस लिया जा सकेगा।
- बाहर निकलने के बाद मंदिर की पृष्ठभूमि में फोटो-वीडियो लेने की अनुमति रहेगी।
चारधाम यात्रा की अन्य तैयारियां
बैठक में आयुक्त ने निर्देश दिए कि फरवरी तक सभी जनपदों को धनराशि जारी कर दी जाएगी। अत्यावश्यक कार्यों की सूची 3 दिन में और टेंडर प्रक्रिया 1 सप्ताह में पूरी कर फास्ट ट्रैक मोड में काम शुरू किया जाए।
पिछले सीजन में 50 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे, जबकि 2023 में रिकॉर्ड 56 लाख यात्रियों ने दर्शन किए। सरकार का लक्ष्य है कि इस वर्ष यात्रा और अधिक सुगम, सुरक्षित और मर्यादित बने। सड़क, स्वास्थ्य, संचार, परिवहन और आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेजी से चल रही हैं।