
कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों के बीच सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने शनिवार को नाश्ते के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एकजुटता का स्पष्ट संदेश दिया। करीब एक घंटे चली इस मीटिंग के बाद दोनों नेताओं ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी में कोई गुटबाजी या मतभेद नहीं है। कांग्रेस आलाकमान जो भी निर्णय लेगा, दोनों उसका सम्मान करेंगे। यह बयान नवंबर 2025 में सिद्धारमैया के ढाई साल के कार्यकाल पूरा होने के बाद तेज हुई अटकलों के बीच आया है, जब शिवकुमार समर्थक दिल्ली में हाई कमांड से मिलने पहुंचे थे।
सिद्धारमैया का बयान: कोई असमंजस नहीं, विपक्ष की चाल नाकाम
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, “कल से कोई असमंजस नहीं रहा। अभी भी कोई भ्रम या मतभेद नहीं है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स से गलतफहमी हुई, लेकिन हमने तय कर लिया है कि पार्टी हाई कमांड का फैसला अंतिम होगा। हमारा मुख्य एजेंडा 2028 का विधानसभा चुनाव और निकाय चुनाव हैं। हमने इन पर विस्तृत चर्चा की और कांग्रेस को फिर से सत्ता में लाने की रणनीति पर सहमति जताई। हमारे बीच कोई मतभेद नहीं था और न भविष्य में होगा।”
सिद्धारमैया ने भाजपा और जेडीएस पर निशाना साधते हुए कहा, “इन दलों को झूठे आरोप लगाने की पुरानी आदत है। उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव लाने की धमकी दी है, लेकिन उनके पास महज 60 विधायक हैं और जेडीएस के पास 18। हमारे पास 140 विधायक हैं, वे कभी संख्या का मुकाबला नहीं कर सकते। यह उनकी बेकार की कोशिश है, हम उनके झूठ का डटकर मुकाबला करेंगे।” यह बयान 20 नवंबर को सरकार के अर्धकाल पूरा होने के बाद तेज हुई अटकलों के संदर्भ में आया, जब शिवकुमार के समर्थक दिल्ली में हाई कमांड से मिले थे।
शिवकुमार का समर्थन: हाई कमांड का मानेंगे, जनता का समर्थन बरकरार
डीके शिवकुमार ने कहा, “राज्य की जनता हमें पूर्ण समर्थन दे रही है। हम अपने चुनावी वादों पर काम कर रहे हैं और लोगों की इच्छाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है, हम सभी मिलकर काम कर रहे हैं। सीएम ने जो कहा, मैं पूरी तरह सहमत हूं। हाई कमांड जो कहेगा, हम वही मानेंगे।” शिवकुमार ने खुद को “पार्टी का अनुशासित सिपाही” बताया और कहा कि वे 29-30 नवंबर को दिल्ली जाएंगे, जहां किसान मुद्दों पर चर्चा होगी, लेकिन नेतृत्व पर फैसला आलाकमान का होगा।
नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा क्यों तेज? 2023 का ‘रोटेशन फॉर्मूला’ फिर सतह पर
2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद ही सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच सीएम पद को लेकर खींचतान शुरू हो गई थी। दिल्ली में हाई कमांड ने सिद्धारमैया को सीएम और शिवकुमार को डिप्टी बनाया। मीडिया रिपोर्ट्स में ढाई-ढाई साल के रोटेशन फॉर्मूले का जिक्र था, हालांकि दोनों नेताओं और पार्टी ने इसे कभी आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया। सिद्धारमैया के समर्थक उन्हें पूर्ण कार्यकाल के लिए बरकरार रखना चाहते हैं, जबकि शिवकुमार के खेमे में चुनाव प्रबंधन क्षमता को देखते हुए उनका नाम आगे आ रहा है।
20 नवंबर को अर्धकाल पूरा होने के बाद शिवकुमार के समर्थक विधायक दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने हाई कमांड से नेतृत्व बदलाव की मांग की। केंद्रीय नेतृत्व ने कैबिनेट रीशफल पर विचार किया, लेकिन सिद्धारमैया ने कहा कि दो खाली पदों को भरने का फैसला आलाकमान लेगा।
वरिष्ठ नेता सतीश जरखीहोली ने सिद्धारमैया का समर्थन किया, जबकि शिवकुमार ने कहा कि कोई “नवंबर क्रांति” नहीं होगी। हाई कमांड ने स्पष्ट किया कि 2028 चुनाव से पहले कोई जल्दबाजी नहीं होगी।




