
बरेली के शाही थाना क्षेत्र के काशीपुर गांव में शुक्रवार को एक ऐसा दृश्य दिखा, मानो कोई फिल्मी कहानी हकीकत में उतर आई हो। ढाई दशक पहले महज 15 साल की उम्र में घर से नाराज होकर भागे ओम प्रकाश 25 साल बाद अपने असली नाम और धर्म के साथ गांव लौटे। इस दौरान वे दिल्ली में ‘सलीम पुत्र ताहिर हुसैन’ बनकर रह रहे थे, निकाह किया, पांच बच्चों के पिता बने और तीन बेटियों की शादी भी कर दी। लेकिन मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने उनकी जिंदगी में नया मोड़ ला दिया।
ओम प्रकाश ने बताया कि 1999-2000 के आसपास छोटी-सी बात पर घर वालों से नाराज होकर वे पहले बरेली में मजदूरी करने लगे। फिर दिल्ली पहुंच गए। वहां किराए का कमरा लेने के लिए आधार या कोई आईडी नहीं थी। मोहल्ले वालों ने सुझाव दिया कि मुस्लिम नाम रख लें तो आसानी होगी। बस फिर क्या था – ओम प्रकाश बनकर गए युवक ‘सलीम’ बन गए। उसी नाम से वोटर कार्ड बनवाया, मोहल्ले की शाहरबानो से निकाह किया और चार बेटियां – रुखसाना, रुखसार, रूपा, कुप्पा और एक बेटा जुम्मन हुआ। तीन बेटियों की शादी भी हो चुकी है।
हाल ही में जब SIR अभियान चला और नई मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए दस्तावेज मांगे गए, तो दिल्ली में ‘सलीम’ के नाम का कोई पुराना रिकॉर्ड नहीं मिला। परेशान ओम प्रकाश ने अपनी बड़ी बहन चंद्रकली से संपर्क किया। बहन ने उन्हें गांव बुलाया। जैसे ही वे गांव पहुंचे, पुराने पड़ोसी और रिश्तेदार पहचान गए। गांव वालों ने फूल-मालाओं, ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजे के साथ उनका जोरदार स्वागत किया।
शुक्रवार को पूरे विधि-विधान से शुद्धिकरण कराकर ओम प्रकाश ने फिर से सनातन धर्म अपनाया। छोटा भाई रोशन लाल, भतीजा कुंवर सेन, गांव प्रधान वीरेंद्र राजपूत समेत सैकड़ों ग्रामीण खुशी से झूम उठे। ओम प्रकाश की आंखों में आंसू थे। उन्होंने कहा, “25 साल बाद अपने घर, अपने नाम और अपने धर्म की गोद में लौट आया हूं। अब यहीं रहूंगा, गांव के पते पर नई आईडी बनवाऊंगा और परिवार के साथ नजदीक नया जीवन शुरू करूंगा।”
गांव वालों का कहना है कि SIR जैसे अभियान से न सिर्फ मतदाता सूची दुरुस्त हुई, बल्कि एक भटका हुआ बेटा भी अपने घर लौट आया। यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।




