उत्तर प्रदेश

यूपी में दिवाली में सफर की कठिनाई: ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं, बसों की छत पर सवारी; रेलवे स्टेशन पर लोगों का हुजूम, रोडवेज के दावे फेल

उत्तर प्रदेश में दिवाली के पावन पर्व पर घर लौटने की होड़ में यात्रियों की भारी भीड़ ने रेलवे और रोडवेज की सारी व्यवस्थाओं को झुका दिया है। रविवार को आगरा, लखनऊ, कानपुर जैसे प्रमुख स्टेशनों और बस स्टैंडों पर हाहाकार मच गया।

ट्रेनों में सीट के लिए मारामारी हुई, जबकि बसें खचाखच भरने के बावजूद अपर्याप्त साबित हुईं। कई यात्री बसों की छत पर जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं। रेलवे ने दिवाली-छठ के लिए 1,100 से अधिक स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं, लेकिन भीड़ के आगे ये कम पड़ गईं। आगरा जैसे शहरों में जहां रोज 150 से अधिक ट्रेनें चलती हैं, वहां भी पैर रखने की जगह नहीं बची।

ईदगाह जंक्शन (आगरा) पर दोपहर करीब 12:30 बजे खड़ी कामाख्या-गांधीधाम एक्सप्रेस में पैर रखने की भी जगह नहीं थी। स्लीपर कोच से लेकर जनरल कोच तक यात्री खड़े होकर सफर कर रहे थे। कई दरवाजों पर लटकते नजर आए। दिव्यांग कोच में बैठे यात्री रवि ने बताया, “सामान्य लोग दिव्यांग कोच में घुस आए। सीट से हटने को कहा तो झगड़ा करने लगे।”

रेलवे ने प्रयागराज, आगरा, झांसी मंडलों में 44 स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं, जो 650 ट्रिप कर रही हैं, लेकिन बिहार-यूपी रूट्स पर भीड़ अनियंत्रित है।

रोडवेज की स्थिति भी बेहाल रही। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) ने दिवाली पर पर्याप्त बसें चलाने का दावा किया था, लेकिन सैकड़ों अतिरिक्त बसें और फेरे बढ़ाने के बावजूद यात्री घंटों इंतजार करते रहे।

लखनऊ, सीतापुर, इटावा के लिए सबसे अधिक भीड़ देखी गई। अबुल उलाह कट, रामबाग फ्लाईओवर और वाटर वर्क्स पर बसों के इंतजार में लंबी कतारें लगीं। देर रात तक लोग इंतजार करते रहे। ईदगाह बस स्टैंड पर ग्वालियर, जयपुर, धौलपुर और भरतपुर जाने वालों की भारी भीड़ रही। स्टैंड के बाहर भी यात्री खड़े दिखे।

यह स्थिति ईदगाह बस स्टैंड की महत्वपूर्णता को रेखांकित करती है, जो आगरा कैंट रेलवे स्टेशन से मात्र 1-2 किमी दूर है और दिल्ली, जयपुर, लखनऊ जैसे शहरों से जुड़ा है। यात्रियों ने सुरक्षा की चिंता जताई, खासकर छत पर सवारी करने वालों ने।

रेलवे और RTO ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं, लेकिन भीड़ के आगे इंतजाम कम साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पेशल ट्रेनों के बावजूद बुकिंग सिस्टम में सुधार जरूरी है।

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