बारिश का कहर: जम्मू-कश्मीर, पंजाब, असम, ओडिशा और तेलंगाना में बाढ़ से हाहाकार, मौसम विभाग की चेतावनी

देशभर में मानसूनी बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा जैसे राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में 8, तेलंगाना और ओडिशा में 7 लोगों की मौत की खबर है, जबकि महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में 2,200 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

मौसम विभाग ने अगले सात दिनों तक उत्तर और पश्चिम भारत में भारी बारिश की चेतावनी दी है, जिसमें उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 29 अगस्त को अत्यधिक बारिश की आशंका जताई गई है। तेलंगाना, कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, केरल और कर्नाटक में भी भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है।

जम्मू-कश्मीर में राहत और बचाव कार्य तेज
जम्मू-कश्मीर में बीते बुधवार को 24 घंटों में रिकॉर्ड 380 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 1910 के बाद सबसे अधिक है। कटरा में 284 मिमी बारिश ने हालात को और गंभीर कर दिया। तवी और चिनाब नदियां उफान पर हैं, जिससे जम्मू, रियासी, उधमपुर, कठुआ और सांबा जैसे जिले जलमग्न हो गए। जम्मू-श्रीनगर और जम्मू-पठानकोट हाईवे बंद होने से हजारों यात्री और तीर्थयात्री फंस गए।

गुरुवार को बारिश में कमी से बचाव कार्यों में तेजी आई, और रेलवे ने जम्मू से नई दिल्ली के लिए विशेष अनारक्षित ट्रेन चलाई। सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें चिनूक और एमआई-17 हेलिकॉप्टरों के साथ राहत कार्य में जुटी हैं। कठुआ में बीएसएफ और सीआरपीएफ कैंप पानी में डूब गए, लेकिन जवानों को सुरक्षित निकाल लिया गया।

पंजाब में आठ जिले बाढ़ की चपेट में
पंजाब के पठानकोट, गुरदासपुर, फाजिल्का, कपूरथला, तरनतारन, फिरोजपुर, होशियारपुर और अमृतसर जिले पिछले चार दिनों से बाढ़ से प्रभावित हैं। रावी, सतलज और ब्यास नदियों में उफान के कारण हालात बिगड़ गए हैं। गुरदासपुर में सेना ने चीता हेलिकॉप्टर से फंसे लोगों को निकाला, जबकि डेरा बाबा नानक में धूसी बांध टूटने से करतारपुर कॉरिडोर के पास कई गांव डूब गए। हजारों एकड़ फसल नष्ट हो चुकी है।

असम और तेलंगाना में तबाही
असम के गुवाहाटी में कई रिहायशी इलाके पानी में डूबे हैं, जिससे जनजीवन ठप हो गया है। तेलंगाना के राजन्ना सिरसिला जिले में अपर मनैर परियोजना के पास फंसे लोगों को सेना के हेलिकॉप्टरों ने बचाया। हकीमपेट से भी राहत कार्यों के लिए सैन्य हेलिकॉप्टर तैनात किए गए। तेलंगाना में सात लोगों की मौत की खबर है, और मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में और बारिश की चेतावनी दी है।

ओडिशा और छत्तीसगढ़ में नुकसान
ओडिशा में भी सात लोगों की मौत हुई है, और कई क्षेत्रों में बाढ़ ने तबाही मचाई है। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में आठ लोगों की जान गई, और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। बस्तर में सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने से राहत कार्यों में बाधा आ रही है।

महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में राहत कार्य
महाराष्ट्र के नांदेड़ और लातूर में भारी बारिश के बाद 2,200 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। नांदेड़ में 115 मिमी और लातूर में 65 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई। मध्य प्रदेश में उज्जैन की शिप्रा नदी के उफान पर होने से रामघाट मंदिर जलमग्न हो गया। प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की है।

हिमाचल में मणिमहेश यात्रा पर संकट
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और भूस्खलन ने मणिमहेश यात्रा को प्रभावित किया है। 24 से 27 अगस्त तक सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई, आठ घायल हैं, और नौ लापता हैं। करीब 8,000 यात्री रास्तों में फंसे हैं, जिनमें से 3,457 को सुरक्षित निकाला गया। रावी नदी में अचानक बाढ़ से कांगड़ा के बड़ा बंगाल गांव में स्कूल, पंचायत भवन और राशन भंडार बह गए। चंडीगढ़-मनाली राजमार्ग बनाला में भूस्खलन और ब्यास नदी के उफान से बंद है।

मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने 29 अगस्त को उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, केरल और कर्नाटक में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है। अगले सात दिनों तक उत्तर और पश्चिम भारत में मानसून सक्रिय रहेगा, और कई क्षेत्रों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना रहेगा। प्रशासन ने लोगों से नदियों और निचले इलाकों से दूर रहने की अपील की है।

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