उत्तर प्रदेश

आजम खां की मायावती को सलामी: पुराने रिश्तों का जिक्र, सियासी गलियारों में सपा-बसपा गठजोड़ की अटकलें तेज

समाजवादी पार्टी (सपा) के दिग्गज नेता आजम खां ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती की तारीफों के पुल बांधकर उत्तर प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने मायावती को न केवल एक बड़े जनसमूह की नेता बताया, बल्कि उनके साथ अपने पुराने रिश्तों को भी याद किया।

आजम ने कहा कि मायावती उनके लिए मेहमान रह चुकी हैं और उनके बड़ों से उनका गहरा नाता रहा है। इस बयान ने सपा-बसपा गठजोड़ की अटकलों को हवा दे दी है, खासकर तब जब यह चर्चा जोरों पर थी कि आजम खां बसपा की ओर रुख कर सकते हैं।

मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में आजम ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि जब मायावती रामपुर में रैली के लिए आई थीं, तब वह उनकी मेहमान थीं। उन्होंने एक रोचक किस्सा साझा किया कि लखनऊ में जब वह सुबह फज्र की नमाज पढ़ते थे, तब बसपा संस्थापक कांशीराम मायावती से मिलने आते थे और आधा-एक घंटे बातचीत कर चले जाते थे। मायावती के प्रति सम्मान जताते हुए आजम ने कहा कि वह ऐसी कोई बात नहीं कह सकते जो उनके लिए दुख का कारण बने या शिकायत का आधार बनाए।

लखनऊ में हाल ही में हुई मायावती की रैली में सपा सरकार पर लगाए गए आरोपों के सवाल पर आजम ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक शिकायत है और इसका जवाब सपा के वही नेता देंगे जो मायावती के स्तर के हैं। पिछले दस वर्षों की अपनी तकलीफों का जिक्र करते हुए आजम ने कहा कि वह आठ-दस साल से ऐसे हालात का सामना कर रहे हैं कि उन्हें यह भी नहीं पता कि कौन सा पार्क कहां था। उनके लिए यह समय बेहद कठिन रहा है।

आजम ने भविष्य की संभावनाओं पर बात करते हुए कहा कि अगर सपा सत्ता में आती है, तो वह कोशिश करेंगे कि मायावती की शिकायतों का समाधान हो और उन्हें भविष्य में कोई शिकायत का मौका न मिले। इस बयान ने सियासी हलकों में 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा-बसपा के बीच संभावित सहयोग की चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि आजम का यह बयान सपा के लिए दलित वोट बैंक को लुभाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जबकि अन्य इसे व्यक्तिगत सम्मान और पुराने रिश्तों की गर्माहट के तौर पर देख रहे हैं।

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