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सहारनपुर कहने को मंडल मुख्यालय, रहने को नहीं

सहारनपुर शहर में बाहर से आया कोई आदमी अपने दिमाग में क्या लेकर जाता है? शहर की हर सड़क पर बिखरी गंदगी, बजबजाते नाले, होर्डिग के जंगल और जाम में घंटों फंसे रहने का अनुभव। शहर की तमाम उद्यमिता और अच्छाई पर ये सब भारी पड़ जाता है। खुले हुए नाले में गिरकर लगातार दुर्घटनाएं दुनिया के सभ्य समाज को चौंकाती हैं, लेकिन नेताओं के लिए इनका कोई मतलब नहीं है। वो नालों पर अतिक्रमण अभियान के खिलाफ तो खड़े हो जाते हैं, लेकिन नाला सफाई और उनके ढंकवाने की बात उनके लिए मायने ही नहीं रखते। कूड़े के ढेर पर बैठे शहर में बुनियादी समस्या कोई मुद्दा ही नहीं है। यह स्थिति तब है जब वर्ष 1996 में सहारनपुर मंडल मुख्यालय बना पर मंडल जैसी सुविधा आज तक नहीं मिली।

नौ साल से अटका कूड़ा निस्तारण प्लांट

शहर में 434 टन कूड़ा रोजाना पैदा होता है। 2007 में 88 करोड़ रुपये की कूड़ा निस्तारण की योजना तैयार हुई थी। इसे कमेला कालोनी, संकलापुरी रोड व मल्हीपुर रोड में बनाना था, लेकिन अभी तक जमीन तक चिन्हित नहीं हुई, इसके बाद से शहर की सफाई केवल भगवान भरोसे ही है। हालांकि अब कूड़ा निस्तारण प्लांट के लिए जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया चल रही है। ठोस कूड़ा प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) सबसे महंगी पालिका सेवा है, जिसे किसी स्थानीय निकाय को अपने निकाय कार्य में अनिवार्य रूप से शामिल करना होता है। उस पर सकल राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग एक प्रतिशत खर्च अनिवार्य है। इस कूड़े में प्लास्टिक, शीशा व धातु के रूप में गैर बायोडिग्रेडेबल कचरा है। सहारनपुर में पर्यावरण अनुकूल संग्रहण केंद्र एक भी नही है। पिछले एक दशक में सहारनपुर नगर निगम समेत इन दस निकायों में 1250 से अधिक नई कालोनियां व मोहल्ले विकसित हुए, पर इनमें से एक में भी संग्रह केंद्र नहीं बना। कूड़ा एकत्र करने के लिए स्थानीय निकायों द्वारा अपने स्तर से खरीदे गए विशेष कंटेनर खुद कबाड़ बन चुके हैं। पॉश कालोनी आवास-विकास, हकीकत नगर, नेहरू मार्केट रोड, नुमाईश कैंप, रणजीत नगर व मटिया महल आदि कालोनियों में हर तरफ कूड़े का साम्राज्य है। किसी भी पार्टी के नेता के लिए यह चुनाव में मुद्दा नहीं है।

बीमार कर रहे हैं, जान ले रहे हैं नाले

शहर के आठ बड़े नालों समेत 196 प्रमुख नाले 12 महीने गंदगी से लबालब रहते हैं। खुले नाले शहर की जनता का काल बन रहे हैं। हर साल शहर में दो-तीन जान ये लील रहे हैं। दर्जनों दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। शहर में 328 किमी सीवर लाइन 30 साल से है, लेकिन उसके ट्रीटमेंट का इंतजाम नहीं है। 110 करोड़ का सीवरेज प्रोजेक्ट भी अधूरा है। पीने का पानी भी शहर की 70 फीसदी जनता को मयस्सर नहीं है। जेएनएनयूआरएम योजना अन्तर्गत 850 करोड़ के प्रोजेक्ट केन्द्र को भेजे गए पर वह प्रोजेक्ट ही मंजूर नहीं हुआ।

बुनियादी सुविधा भी नहीं दे पाए दिग्गज

एक साल से सरकार में मंत्री साहब ¨सह सैनी है, इससे पहले देवबंद से विधायक राजेन्द्र राणा मंत्री रहे। एमएलसी उमर अली जैसे सपा नेता सत्ता में रहे, लेकिन इन समस्याओं पर कभी ध्यान नहीं दिया। पूर्व सांसद रशीद मसूद, जिला अध्यक्ष जगपाल दास, पूर्व जिला अध्यक्ष मुजाहिद मुखिया, पूर्व मंत्री सरफराज खान भी सपा में खासे प्रभावी रहे, लेकिन साफ-सफाई, नाले शायद कभी इनके मुद्दे ही नहीं रहे। सहारनपुर नगर निगम आठ साल पहले बनी पर आज तक राजनैतिक हस्तक्षेप के चलते यहां चुनाव नहीं हुआ। नगर विकास मंत्री मो. आजम खान कई बार शहर में आए। उन्होंने शहर को कूड़ा मुक्त, खुले नालों से मुक्ति दिलाने आदि कई वायदे भी किए पर हुआ कुछ नहीं। भाजपा विधायक राजीव गुंबर ने कई बार सदन में यह मांग उठाई पर हुआ कुछ नहीं। बसपा के मंडल को-ऑर्डिनेटर नरेश गौतम भी लखनऊ में इस बाबत बात करने का दावा करते रहे पर हुआ कुछ नहीं। बहरहाल, साफ-सफाई गंभीरता से इनका मुद्दा ही नहीं है।

घरों में भर रहा सीवर का पानी

शहर में 328 किमी पुरानी सीवर लाइन है, जिसके ट्रीटमेंट का इंतजाम नहीं है। इस लाइन का पानी भरा रहता है। कुछ इलाकों में इन्हें नालों में बहाया जा रहा है। अधिकांश स्थानों पर सीवर घरों में भरा रहता है।

नालों में हो रही दुर्घटना और मंत्रीजी मुकर गए

शहर में वैसे तो छोटे बड़े नालों की संख्या 196 से अधिक है। करेंजी नाला, चिलकाना रोड, चौकी सराय, दिल्ली रोड, धोबी घाट का नाला, खानआलमपुरा नाला, जेबीएस नाला समेत आठ नाले विशाल हैं। ये नाले 12 महीने गंदगी से लबालब रहते हैं, जिसकी सफाई नहीं होती। सफाई के नाम पर केवल निगम का खजाना खाली होता है। हर साल करोड़ों रुपये खजाने से निकलते हैं, लेकिन नालों की गंदगी बाहर नहीं आ पाती। खुले नालों में हर साल दो से तीन साल तक के मासूम बच्चे व एक दर्जन से अधिक वाहन समा जाते हैं। खुले नालों को ढकने की बात चली तो नगर विकास मंत्री आजम खां ने 320 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट से नालों को ढकने की घोषणा की थी। यह घोषणा ही रह गई, एक साल बाद मंत्री जी को उनकी घोषणा याद दिलाई गई तो उन्होंने ऐसी किसी घोषणा से ही इंकार कर दिया। सहारनपुर विकास प्राधिकरण या उप्र आवास एवं विकास परिषद भी नालों को ढकने का प्रोजेक्ट आज तक तैयार न कर सका।

आठ लाख जनता को शुद्ध पेयजल का इंतजार

आठ लाख की आबादी वाले सहारनपुर शहर की 60 फीसदी जनता को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा है। विभिन्न योजनाओं में शहर वासियों को शुद्ध पेयजल देने की बात हुई पर हुआ कुछ नहीं। सात साल में जल निगम ने लाइनें तो बिछाई, लेकिन अभी पानी नसीब वालों को ही मिल रहा है। जहां भी पानी छोड़ा जा रहा है वहीं पर नई लाइनें फट रही हैं और पेयजल सड़कों पर बह रहा है।

गंदे सरकारी ऑफिस

शहर के जैसा ही सरकारी ऑफिसों का हाल है। यहां गंदगी पसरी रहती है, दीवारें पान की पीक से सनी रहती हैं। जमीन खाली है तो उसमें ऊंची ऊंची घास उगी है। प्रशासन, पुलिस व प्रमुख विभागों को यदि छोड़ दें तो अन्य विभागों के ऑफिसों में कर्मचारियों के बैठने तक के हालात नहीं हैं। जनता भी यहां जाकर बीमारियों की शिकार हो रही है। पेयजल, शौचालय जैसी जनसुविधाओं की तो यहां बात करना ही बेमानी है।

इनकी भी सुनें..

शहर की समस्याओं के समाधान के लिए हमने अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रयास किया। चार वर्ष में निगम में रिकार्ड 300 करोड़ से ज्यादा के विकास कार्य हुए। सफाई व्यवस्था पर ध्यान दिया गया है। जल्द घर-घर से कूड़ा भी उठवाया जाएगा। सफाई व्यवस्था को भी सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। अवैध होर्डिग और यूनिपोल पर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं, जिनका पालन करने में संबंधित अफसर लापरवाही कर रहे हैं। उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी।

– ओपी वर्मा, नगर आयुक्त

सपा सरकार ने शहरों को साफ-सुथरा बनाने का प्रयास किया है। नगरों की सफाई पर विशेष जोर दिया गया। सपा ने घोषणा पत्र में सत्ता में लौटने पर मॉडल शहर बनाने का वादा किया है। सपा जो वादा करती है, उसे पूरा करती है।

– साहब ¨सह सैनी, कैबिनेट मंत्री

केंद्र सरकार ने स्वच्छता के लिए 950 करोड़ रुपये जारी किए, लेकिन प्रदेश सरकार 50 करोड़ भी नहीं खर्च कर सकी। यह इनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान है। उप्र में मेयर के अधिकारों को प्रदेश सरकार ने सीज कर रखा है, जिससे कई काम में बाधा आती है। सहारनपुर में तो जानबूझ कर सपा सरकार ने नगर निगम के चुनाव ही नहीं होने दिए। प्रदेश के मंत्री आजम खां ने भी बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन उसे अमली जामा नहीं पहनाया। हम इस दिशा में अब विशेष जोर देंगे, वार्डवार स्थिति सुधारने का प्रयास होगा।

 

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