Wednesday , March 20 2019
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स्वास्थ्य सेवाएं हुई बदहाल, एम्बुलेंस न मिलने पर वृद्ध को रिक्शे पर पहुंचे परिजन, नहीं मिला स्ट्रेचर 

ब्रजेन्द्र राजपूत

महोबा। जिले में स्वास्थ सेवाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही है। मरीजों को मिलने वाली सरकारी एम्बुलेंस सेवा मजाक बनकर रह गयी है। हालात यह है कि ग्रामीण इलाके से हो या शहरी इलाके में एम्बुलेंस सेवा पूरी तरफ धड़ाम है।

कई बार फोन करने पर भी कंट्रोल रूम से मरीज का फोन नही उठा तो मरीज के परिजन जानवर ढोने वाले रिक्शा से बीमार वृद्ध को इलाज के लिए जिला अस्पताल लाये।

वहीँ जिला अस्पताल पहुँचने पर मरीज को स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने वाली सरकार में बदहाल सिस्टम की मार देखने को मिली है।

सूबे की सरकार स्वास्थ सेवाओं को बेहतर रखने के निर्दश जिम्मेदारों को दिए है मगर महोबा में इसका असर नजर नहीं आ रहा। एक के बाद एक सामने आते मामले जिले में लचर हो चुकी स्वास्थय सेवाओं की तरफ इशारा कर रही है।

मामला महोबा शहर कोतवाली के बाईपास का है। जहाँ रहने वाले वृद्ध दिल्लीपर के पैर में फैक्चर की शिकायत होने पर परिजनों ने 108 एम्बुलेंस सेवा को दो-तीन बार फोन किया मगर कंट्रोल रूम से फोन नहीं उठा।

ऐसे में मजबूरी में मरीज के परिजनों को मृत पशुओं को ढोने वाले रिक्शा से अस्पताल पहुंचना पड़ा। वहीँ बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का वादा करने वाले महोबा जिला अस्पताल में मरीज को स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ।

वृद्ध के परिजन उसको गोद मे उठाकर  डॉक्टर के पास पहुँचे। वही परिजनों का कहना है कि सरकार के दावे विफल है। एम्बुलेंस का लाभ गरीबो को नहीं मिल पा रहा कई बार फोन करने पर भी एम्बुलेंस नहीं आई। यदि वो सरकारी एम्बुलेंस के सहारे रहते तो हमारा मरीज अस्पताल ही नही पहुँच पाता।

वहीँ सीएमएस उदयवीर सिंह से मरीज को एम्बुलेंस का न मिलने का कारण पूछा तो उन्होंने इससे पल्ला झाड़ते हुए कहा कि 108 एम्बुलेंस सेवा हमारे पास नही है। इसका संचालन लखनऊ से होता है, वहीँ जब स्ट्रेचर न मिलने की बात पूछी तो उन्होंने अस्पताल के बाहर दो वार्डबॉय तैनात होने की बात कही।उन्होंने कहा कि जो भी मरीज के परिजन स्ट्रेचर मांगते है उनको वार्डबॉय के द्वारा स्ट्रेचर उपलब्ध कराया जाता है।

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