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बदहाल हुए सरकारी विद्यालय, सरकार ने मूंदी आंखें  

बलरामपुर। यूपी में योगी सरकार बनने के बाद सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने की कवायद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शुरू किया गया था। सीएम योगी ने सरकारी स्कूलों की बराबरी कॉन्वेंट स्कूलों से करने की घोषणा भी की थी परंतु जनपद बलरामपुर में सीएम योगी की सारी घोषणाएं खोखले साबित हो रहे हैं।

जनपद बलरामपुर के राजकीय इंटर कॉलेज दारी चौरा की जहां पर कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई की जाती है और को एजुकेशन के तहत लगभग 700 छात्र छात्राएं इस विद्यालय में पठन-पाठन ग्रहण कर रहे हैं जिसमें अधिकांश लड़कियां हैं जो दूर के विद्यालयों में नहीं जा सकती हैं।

भगवान भरोसे चल रहे इस विद्यालय में केवल तीन अध्यापक कार्यरत हैं। ऐसे में कन्वेंट स्कूल की तर्ज पर शिक्षा उपलब्ध कराने की बात सोचना भी बेईमानी होगी। एक तरह सेकहा जाए तो इस विद्यालय में छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

जनपद बलरामपुर में कुल 4 राजकीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। जिनमें से एक कन्या विद्यालय हैं तथा 3 विद्यालयों में को एजुकेशन की व्यवस्था लागू है। उन्हीं में से एक विद्यालय है।

राजकीय इंटर कॉलेज दारीचोरा में सब कुछ संसाधन तो मौजूद है। विज्ञान प्रयोगशाला से लेकर पठन-पाठन के लिए कक्ष भी मौजूद है परंतु अगर नहीं मौजूद है तो वह हैं। शिक्षा की अहम कड़ी शिक्षक इस विद्यालय में हिंदी तथा समाजशास्त्र के एक-एक अध्यापक की तैनाती है।एक अध्यापक संविदा पर सेवानिवृत अध्यापक की नियुक्ति कीगई है।

कक्षा 6 से 12 तक चलने वाले इस विद्यालय में 9 लेक्चर तथा 12 एलटी ग्रेड के अध्यापकों की तैनाती होनी चाहिए जिसके सापेक्ष केवल एक लेक्चर तथा एकएलटी ग्रेड अध्यापक की तैनाती की गई है।

विद्यालय में विज्ञान विषयों की पढ़ाई नहीं हो रही है। बताया जा रहा है कि विज्ञान गणित अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों केअध्यापकों की तैनाती नहीं है। बच्चे साइंस विषयों की पढ़ाई करना चाहते हैं परंतु अध्यापक ना होने के कारण मायूस होकर उन्हें आर्ट्स विषय की पढ़ाई करनी पड़ रही है।

इस विद्यालय की व्यवस्था देख कर नहीं लग रहा है कि सीएम योगी अपनी घोषणाओं को लेकर संवेदनशील भी हैं। क्या प्रशासन को यह जानकारी नहीं है कि राजकीय विद्यालयों में अध्यापकों की कमी चल रही है। विद्यालय के प्रधानाचार्य विनय मोहन त्रिपाठी का कहना है कि बार-बार शासन को पत्र लिखा जा रहा है।

उन्हें कम से कम एक एक अध्यापक सभी विषयों के उपलब्ध करा दिए जाएं तो साइंस की पढ़ाई भी शुरू करा दी जाए। कक्षा 6 से 12 तक चल रहे सभी कक्षाओं को देखने के लिए भी एक अध्यापक नहीं है। इतना ही नहीं प्रयोगशाला में लैब असिस्टेंट भी नहीं है।

विद्यालय में 12 अनुचर होने चाहिए जिसके सापेक्ष केवल दो अनुचरकी तैनाती की गई हैं। विद्यालय में किसी भी स्वीपर की तैनाती नहीं है जिसके कारण साफ सफाई भी समुचित तरीके से नहीं हो पाती हैं।

विद्यालय में 500 से अधिक छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। जिसके लिए कम से कम एक या दो महिला अध्यापक होनी ही चाहिए परंतु एक भी महिला अध्यापक विद्यालय में तैनात नहीं है। ऐसे में कैसे उम्मीद की जाए कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था की तुलना कॉन्वेंट विद्यालय से की जा सकेगी।

लाइव टुडे की टीम ने विद्यालय के बच्चों से उनकी समस्याएं जानने की कोशिश की तो बच्चों का दर्द छलक कर सामने आ गया। तमाम छात्र-छात्राएं ऐसी हैं जो विज्ञान वर्ग की पढ़ाई करना चाहते थे परंतु अध्यापक ना होने के कारण इस विद्यालय में आर्ट वर्क की पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं।

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