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प्लास्टिक के बोरी में बैठकर पढ़ने मजबूर सरकारी स्कूल के छात्र, नहीं मिली मूलभूत सुविधा

अमर सदाना

कवर्धा। सरकार द्वारा शिक्षा में गुणवत्ता लाने व छात्रों का सर्वांगीण विकास के लिए अनेक योजनाए बनाई है। इसके लिए करोड़ो रुपए पानी की तरह बहाया भी गया है। लेकिन इसका परिणाम धरातल में दिखने के बजाय सिर्फ कागजो में दिखाई देती है। जिसके चलते सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले छात्रा आज भी मूलभूत सुविधा के लिए तरस रहें है।

इसका सच पण्डरिया विकासखंड के सरकारी मिडिल स्कूल सावंतपुर में देखने को मिला और यहां की सरकारी व्यवस्था देखकर आप भी हैरान हो जायेंगे।

इस स्कूल में कक्षा छठवीं से आठवी तक पढ़ने वाले छात्र कोई टेबल बेंच या दरी में नही बैठते बल्कि अपने घर से लाए हुए प्लास्टिक की बोरी में बैठते है। ये एक दिन की कहानी नही है। बल्कि जब से शिक्षा सत्र प्रारम्भ हुआ तब से यहां के छात्र-छात्राएं प्लास्टिक की बोरी बैठते है।

इतना ही नही यहां के छात्र पीने के लिए पानी स्कूल परिसर से पांच सौ मीटर दूर से लाते है। जिस स्कूल में बैठकर पढ़ते है, यहां पंखा तो लगा हुआ लेकिन चलता नही है। इन हालात में गर्मी में ही बैठकर पढ़ाई करना पड़ता है।

अब इन हालतों को देखकर यही लगता है कि शिक्षा विभाग के सरकारी अमला छात्रों के नाम पर आने वाले सुविधा व संसाधन को स्वयं उपभोग करते है या फिर जो सुविधा या संसाधन कि बात होती है व सिर्फ कागजो में  रह जाती है या फीर गांव के  सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले गरीब बच्चों का शिक्षा के नाम पर उपहास किया जाता है?

ये शारी बातें यह विद्यालय बयां करती है जिसके उदाहरण स्वरूप आज भी यहां के बच्चे मूलभूत सुविधा के अभाव में शिक्षा ग्रहण कर रहें है और जिम्मेदार खानापूर्ति में लगे हैं। वही इस मामले में जिला प्रशासन ने  जांच कर दोषी के खिलाफ कारवाई करने  व व्यवस्था ठीक करने की बात कही।

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