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व्यवस्था के अभाव में दम तोड़ता थत्यूड़ का सीएससी अस्पताल, प्रशासन ने मूंदी आंखें

सुनील सोनकर

मसूरी। सरकार भले ही आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य उपचार के लाख दावें करें लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बंया करती है। राजधानी से मात्र 65 किमी की दूरी पर स्थित धनोल्टी विधानसभा क्षेत्र के जौनपूर विकास खंड मुख्यालय थत्यूड़ में सीएससी की बदहाली सरकार के उचित स्वास्थ्य सेवाओं को आईना दिखाने का काम करती है।

बता दें कि  जौनपुर विकासखंड थत्यूड़ के एक मात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंन्द्र करोड़ों की लागत से बने इस स्वास्थ्य केंन्द्र पर जौनपुर विकासखंड के तकरीबन 80 ग्राम पंचायतों के करीब 38 हजार लोगों के बेहतर स्वास्थ्य उपचार की जिम्मेदारी है।

इसी आकलन से इस अस्पताल का शुभारम्भ विकासखंड मुख्यालय में पीएसी से तब्दील कर सीएससी के रूप में किया गया था। लेकिन स्थिति यह है कि वर्तमान में विभाग की लचर व्यवस्थाओं के कारण आज अस्पताल ही खुद आईसीयू में है।

सरकार की अनदेखी के कारण थत्यूड़ का एक मात्र अस्पताल दम तोड़ता नजर आ रहा है। वहीँ  अस्पताल में 11 पद चिकित्सक के स्वीकृत है। लेकिन वर्तमान में इस अस्पातल मात्र दो डॉक्टर्स ही नियुक्त किये जबकि अस्पताल में लैब है लेकिन टेक्नीशियन नही है।

मशीनों पर जंग लग चुका है इनको देखने वाले कोई नही है। टेक्निशियन के पद वर्षो से खाली पड़े है। किसी भी प्रकार के जांच की सुविधा आजतक यहां पर उपलब्ध नही हो पाई है। जिस कारण 80 ग्राम पंचायतों के लोगों को हर छोटी बडी बिमारी या किसी भी दुर्घटना के समय सीधे देहरादून स्वास्थ्य उपचार के लिये भागना पड़ता है।

स्थानीय लोगों की माने तो थत्यूड़ सीएससी की अव्यवस्थाओं के कारण जहां गरीब लोगों को स्वास्थ्य लाभ के लिये देहरादून जाना पड़ता है।

वहीं प्रसव के दौरान महिलाओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। महिला चिकित्सक ना होने से प्रत्येक डिलीवरी के लिये  देहरादून ले जाना पड़ता है। वही उन्होने बताया कहा कि चैकाने वाली बात तो यह है कि कागजो में अस्पताल में 8 डॉक्टर्स कार्यरत है लेकिन इन 8 डॉक्टर्स ने कभी अस्पताल में आने की जहमत नहीं उठाई व अस्पताल की बदहाली का रोना लगातार लोग रोते आ रहे है लेकिन सरकार है कि सुनने को तैयार ही नही है।

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