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जर्जर आंगनबाड़ी भवन में पढ़ने को मजबूर बच्चे, प्रशासन ने मूंदी आंखें

अमर सदाना

कोंडागांव। कहावत है कि जिस इमारत की नींव कमजोर हो वो इमारत ज्यादा दिन टिक नहीं सकती। ठीक उसी तरह छोटे बच्चों की शिक्षा की नींव जिसे आंगनबाड़ी कहा जाता है, यहीं  बच्चों की शिक्षा का पहला पायदान होता है। जहां से बच्चे धीरे-धीरे आगे की मंजिल में पहुंचने के लिए तैयार होते हैं। अगर इनकी शिक्षा की नींव कमजोर हो जाती है तो क्या होगा इनका भविष्य।

कोण्डागांव जिले में ऐसा ही एक वाकया फरसगांव ब्लाक के चिचाड़ी गांव में देखने को मिला जहां डर के साए में बच्चों का भविष्य गढ़ा जा रहा है। ग्राम पंचायत चिचाड़ी के खासपारा और चिचाड़ी के ही आश्रित ग्राम पाटला में सालों पुराना आंगनबाड़ी भवन जर्जर हो चुका है।

बारिश के दिनों में भवन के छत से टपकते पानी और छत से झड़ते प्लास्टर के चलते, बच्चे हर समय डर के साए में पढ़ रहे हैं।  गुणवत्ताहीन निर्माण के कारण जर्जर भवन के दीवारों में दरारें आ चुकी है।

जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। महिला बाल विकास विभाग एवं पंचायत के अनदेखी की वजह यहां आंगनबाड़ी भवन निर्माण के बाद से नियमित रूप से मरम्मत के अभाव से जर्जर स्थिति में आ गया है।

इस प्रकार स्थानीय निकाय एवं विभाग की उदासीनता से ग्रामवासी काफी नाराज हैं। बच्चों के इस संवेदनशील मुद्दे पर इस प्रकार की घोर लापरवाही निश्चित ही चिंता का विषय है।

चिचाड़ी खासपारा की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के अनुसार आंबा भवन जर्जर स्थिति होने के कारण मुझे पालकों के घर जाकर बच्चों को लाना पड़ता है। पिछले तीन साल से इस केंद्र में सहायिका का पद खाली है।

बच्चों के पालक खासपारा  आंगनबाड़ी भवन की स्थिति को देखकर बच्चों को भेजने के लिए सीधा मना कर दिय थे।

इस संबंध में चिचाड़ी के उपसरपंच लक्ष्मीनाथ यादव ने बताया आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा कई बार समस्या की शिकायत पंचायतों को एवं संबंधित विभागों को किया गया है।

जिसका आज तक कोई निराकरण नहीं हुआ और पंचायत में भी भवन निर्माण हेतु कोई फंड उपलब्ध नहीं कराया गया। जर्जर भवन अब मरम्मत की स्थिति में भी नहीं है। जिसे देखकर पंचायत द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र को अन्य एक निजी भवन के छोटे से कमरे में चला रहा है।

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