Wednesday , March 20 2019
Breaking News

खुले में शौच जाने को मजबूर इस गाँव के ग्रामीण, प्रशासन बेखबर

ब्रजेन्द्र राजपूत

महोबा। खुले में शौच मुक्त भारत का सपना देख रही भाजपा सरकार के मंसूबो पर महोबा जिला प्रशासन पानी फेरता नजर आ रहा है। मुख्यालय से चंद किलोमीटर दूरी पर आज भी लोगों के घरों में शौचालय नहीं बना है।

ऐसे में महिलाओं, बेटियों, बूढ़े लोगों को गाँव से तीन किलोमीटर दूर शौच क्रिया के लिए जाना पड़ता है। लोगों की माने तो गाँव मे शौचालय निर्माण में ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव का सबसे अहम किरदार रहता है। लेकिन प्रधान सचिव शौचालय निर्माण में कोई रुचि नही दिखा रहे है। ऐसे में सरकार की मंशा को ग्राम प्रधान द्वारा पलीता लगाया जा रहा है।

महोबा जिला प्रशासन ओडीएफ करने की मंशा के तहत काम करने का दिखावा कर रही है। मगर आज भी जनपद में दर्जनों गांव ऐसे है जहाँ लोग खुले में शौचं जाने के लिए मजबूर है।

मामला महोबा जनपद के बिलबई गाँव का है। जिला मुख्यालय से महज चंद दूरी पर है आज भी गांव में अधिकांश घरो मे शौचालय न होने के कारण लोगो को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ रही है। गांव की महिलाये बच्चे और विकलांगो को बस्ती से 3 किलोमीटर दूर शौच के लिये जाना पड़ता है।

गांव में ग्राम प्रधान नारायण कुशवाहा और सचिव की लापरवाही के चलते बन रहे सरकारी शौचलाएं आज भी अधूरे पड़े है। गांव में बने ज्यादातर अधूरे शौचलाएं है जो सरकार की मंशा को ही मुंह चिढ़ा रहे है।

ओडीएफ का ढिढोरा पीट रहे सरकारी नुमाइंदों को इस गांव की हकीकत से कोई वास्ता ही नहीं है। शायद यहीं वजह है कि कई बार ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारीयों से इस बावत शिकायत की लेकिन आज तक ग्रामीणों की समस्या को निदान होना तो दूर अधूरे पड़े शौचालयो को पूरा करने तक की जहमत नहीं उठाई गई।

ग्रामीण बताते है कि ग्राम प्रधान इस ओर कोई काम नहीं कर रहे। कई बार ग्राम प्रधान और सचिव को आवेदन दिए मगर आज तक उनके घर में शौचलएं नहीं बन पाये और जो जिनका निर्माण शुरू हुआ वो अधूरे पड़े है। ऐसे है उनके घर की महिलाएं न चाहकर भी खुले में शौचं जाने के लिए मजबूर है।

स्कूल में पढ़ने वाली छात्राएं भी गांव में शौचलाएं न होने से खासी नाराज है। जबकि ग्राम प्रधान खुद को साफ सुथरा बता रहे है। प्रधान कहते है कि उन्होंने गांव के कई लोगो के आवेदन कराये और उनके खाते में शौचालय निर्माण के लिए पैसा भी खाते में आ गया मगर ग्रामीणों ने आधा काम कराकर बाकि पैसा अन्य काम में खर्च कर दिया। अब निर्माण के लिए शिकायत करते घूम रहे है जिसके लिए ग्राम प्रधान जिम्मेदार नहीं है।

About publisher

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *