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शोपीस बना अस्पताल, सालों बाद भी नहीं आयें डॉक्टर्स

राजन गुप्ता

मिर्जापुर। गरीबों को बेहतर स्वास्थ सुविधाएं प्रदान करने  के लिए  प्रदेश सरकार ने पब्लिक  प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल को अपनाया ताकि डॉक्टरों की कामचोरी पर लगाम लगने के साथ गरीबों को बेहतर इलाज मिल सके।

इस योजना के तहत सरकार भवन बना कर प्राइवेट सेक्टर के अस्पतालों को दे देती है। प्राइवेट सेक्टर अपने संसाधन और डॉक्टर से अस्पताल का संचालन कर गरीबों का मुफ्त इलाज करते हैं। गरीबों के इलाज के पैसो का भुगतान वह बाद मे सरकार से प्राप्त करते है।

मिर्जापुर जिला महिला चिकित्सालय परिसर के बगल में 100 बेड का अस्पताल कई महीने से बनकर तैयार है और इसे संचालन के लिए  प्राईवेट सेक्टर के हेरिटेज हॉस्पिटल को सौंप भी दिया गया है।

परंतु अभी तक इस भवन में ना तो कोई डॉक्टर आया ना ही मशीनरी। लगभग 19  करोड़ों की लागत से  बना भवन मात्र शोपीस बनकर रह गया है। सरकार की मंशा के अनुरूप अभी तक गरीबों को इस भवन का लाभ मिलना शुरू नहीं हुआ है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि सरकार ने बिल्डिंग बना कर प्राइवेट सेक्टर के हेरिटेज हास्पिटल को सौप दी है। अब इसके संचालन की सारी व्यवस्थाएं उन्हें ही करनी है और अब तक तो इसका संचालन शुरू भी हो जाना चाहिए था।

परंतु देरी होता देख  इसके लिए उन्हें पत्र भी लिखा जा चुका है लेकिन अभी तक हमें इस बारे मे कोई जवाब नहीं मिला है।  हम फिर से उन्हें  इसे चालू करने के लिए उन्हें पत्र लिखेंगे।

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