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कूड़े का ढ़ेर जलाने से सांस लेना हुआ दूभर, प्रशासन नहीं उठा रहा कदम

रिपोर्ट: कुमार रहमान

बरेली बरेली में कूड़े में आग लगाना आम बात हो गई है। जहरीले धुंवे से लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है और पर्यावरण को भी नुकसान होता है।

कूड़ा

यह पूरा इलाका दिनभर धुंयें से भरा रहता है। इससे बाइक चलाने वालों के साथ ही यहां रहने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है। मेडिकल वेस्टेज को जलाने से उठ रहा यह धुंवा कितना नुकसानदेह होगा। एनजीटी यानि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 22 दिसंबर 2016 को पूरे देश में खुले में कचरा जलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।

साधारण तौर पर कूड़ा जलाने के लिए पांच हज़ार और बड़े पैमाने पर कचरा जलाने के लिए पच्चीस हजार रुपये का पर्यावरण मुआवजा देना होगा। इसके बावजूद बरेली में कूड़े में आये दिन आग लगा दी जाती है।

इन दिनों आसमान में धुंध होने की वजह से धुंवा ऊपर नहीं जा पाता। लोगों का कहना है कि यह आग नगर निगम के कर्मचारी लगा जाते हैं। ताकि उन्हें कूड़ा उठाने न आना पड़े। क्योंकि कूड़े में आग लगाने से उन्हें ही सबसे ज्यादा फायदा है।

दरअसल कूड़े में आग लगाने के पीछे पैसों का खेल है। कूड़े में आग लगाकर उसे जला दिया जाता है और फिर कागजों पर कूड़ा उठाने का गाड़ी की आवाजाही दिखाकर डीजल के पैसे खड़े कर लिए जाते हैं। नगर निगम का कहना है कि यह आग स्थानीय लोग लगाते हैं। नगर आयुक्त राजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि जल्द ही इस पर सख्ती की जाएगी।

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