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शरीर से भी पानी खत्म होने के आसार, प्रशासन की बैठक में सिर्फ बातें

रिपोर्ट: विनोद

मौसम की मार झेल रहे बुंदेलखंड के सबसे पिछड़े जनपद चित्रकूट के लिए बिगड़े हालात कुछ नये नहीं हैं। लेकिन इस बार मुसीबत पहले से ज्यादा है। लोगों के पास खाने के लिए अनाज नहीं है। जानवरों के लिये चारा भी नहीं है। और भूमिगत जल स्तर भी लगातार नीचे जा रहा है।

जिससे गाँवों में पेयजल संकट खड़ा हो गया है। लोग बूँद-बूँद पानी को तरस रहे है।

सबसे बुरे हालात मानिकपुर ब्लाक के हैं, जंहा दर्जनों गांव के ग्रामीण गांव से कई-कई किमी दूर से चोहडो ( पत्थरो के बीच इक्कठा पानी) से दिन भर बैलगाड़ियों से पानी ढोकर अपनी व जानवरों की प्यास बुझा रहे हैं।

जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने भी पानी की किल्लत को लेकर बैठक की है और नीति आयोग की योजना के अनुसार पानी की समस्या वाले क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है गांव गांव टैंकर की व्यवस्था की गई है लेकिन तब भी पाठा में पानी की समस्या बनी हुई है।

चित्रकूट जिले में पाठा के हालातों को देखते हुए पीने के पानी के लिए कुछ सरकारी प्रयास तो हर साल किये जाते रहे है किन्तु यहां की स्थिति इतनी भयावह हो जाती है कि सारे इंतजाम नाकाफी हो जाते है।

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