Tuesday , November 13 2018

बाढ़ से बचाव के लिए बांधों की मरम्मत शुरू लेकिन सरकार का एक दावा निकला झूठ

रिपोर्ट- पंकज श्रीवास्तव

गोरखपुर। वर्ष 2017 में बाढ़ का दंश झेल चुके पूर्वांचल के अधिकतर इलाकों के ग्रामीणों को एक बार फिर मानसून की दहशत सताने लगी है क्योंकि आज भी इलाके के अधिकतर बांधों की हालत जर्जर ही है। हालांकि बांधो की मरम्मत का काम तो कुछ जगहों पर शुरू हो गया है लेकिन धनाभाव के कारण आज भी हालत खराब ही है और अगर समय रहते इन्हे पूरा नहीं किया गया तो एक बार फिर कई गांव बाढ़ की चपेच में आकर डूब जाएंगे।

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जिले के दक्षिणांचल की बात करे तो यहाँ राप्ती घाघरा और कुआनो नदी के प्रलयकारी रूप से बचाने की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड को दी गई है लेकिन इलाके में स्थित 107 किलोमीटर लम्बे बांध की रखरखाव के लिए शासन ने अभीतक केवल यहाँ 40 लाख रूपये ही अवमुक्त किये है।

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जबकि सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड विभाग ने तीनो नदियों पर बाढ़ बचाव कार्य के लिए करीब 100 करोड़ रूपये का प्रस्ताव भेजा है। फंड कम देने के बावजूद सिचाई मंत्री जी कहते है की बांधों की मरम्मत का कार्य तेजी से किया जा रहा है और पैसो की कोई कमी नहीं है।

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