संसदीय समिति ने RBI के मानदंडों पर उठाया सवाल, बिजली क्षेत्र पर गहराएगा संकट 

नई दिल्ली। संसद की एक समिति ने मंगलवार को कहा कि आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) के कर्ज नहीं चुकाने को लेकर बनाए गए नए मानदंड बिजली क्षेत्र के संकट को और गहरा कर देंगे, इसलिए इसमें बदलाव किया जाना चाहिए। ऊर्जा संबंधित संसद की स्थायी समिति ने अपनी रपट में कहा, “आरबीआई के नए दिशानिर्देश बिजली क्षेत्र के संकट को और गहरा करेंगे।”

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भारतीय बैंकों के फंसे हुए कर्जे (एनपीए) सबसे ज्यादा अवसंरचना, बिजली, लोहा, अयस्क और वस्त्र क्षेत्र मैं हैं, जबकि बैंकों द्वारा बिजली क्षेत्र की कंपनियों को दिया गया फंसा हुआ कुल कर्ज 1.8 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है।

समिति ने कहा कि कर्ज न चुकानेवाले की परिभाषा को बदलने की जरूरत है और इसे दिवाला और दिवालियापन संहिता में दी गई परिभाषा के अनुरूप होना चाहिए।

लोकसभा सांसद कम्भमपति हरिबाबू की अगुवाई वाली समिति ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों द्वारा कर्ज नहीं चुकाने के कारण अलग-अलग हैं, इसलिए सभी क्षेत्रों के लिए विशिष्ट नीति बनाने की आवश्यकता है।

समिति ने कहा, “समिति को यह महसूस होता है कि कर्ज डिफाल्ट के जो वर्तमान नियम हैं, उसके तहत बिजली क्षेत्र की संकटग्रस्त परियोजनाएं आखिरकार नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के पास सुनवाई के लिए जाएंगी।”

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