Wednesday , September 20 2017

प्रभु के कार्यकाल में हुए ये बड़े रेल हादसे, जा चुकी है 73 जानें

हादसानई दिल्ली। भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश मे दूसरा बड़ा ट्रेन हादसा होने से रेलवे प्रशासन पर कई सवाल उठ रहे हैं। पिछले ही शनिवार को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में उत्कल एक्सप्रेस रेल हादसा हुआ था  इस हादसे को 5 दिन ही हुए थे कि उत्तर प्रदेश में दूसरा बड़ा रेल हादसा हो गया। बीते दिनों हुए पांच रेल हादसों में मरने वालों की तादाद 73 हो चुकी है जबकि सैकड़ों की तादाद में लोग घायल हुए हैं।

लगातार हो रहे रेलवे दुर्घटना की वजह रेलवे प्रशासन की लापरवाही है क्योंकि पहली दुर्घटना रेलवे ट्रेक पर चल रहे काम की वजह से हुई थी जिसकी जानकारी ट्रेन के ड्राईवर को नही दी गई थी, इस घटना के बाद भी ऱेलवे प्रशासन ने सावधानी नहीं बरती और दूसरा बड़ा रेल हादसा हो गया। मंगलवार-बुधवार की रात 2.40 बजे कैफियत एक्सप्रेस औरैया जिले में एक डंपर से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में किसी के मारे जाने की सूचना तो नहीं है, लेकिन 78 लोग घायल हुए हैं।

आप को बता दें इससे पहले 19 अगस्त को मुजफ्फरनगर के खतौली में कलिंग उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हुई थी  जिसमें 23 यात्रियों की मौत हो गई थी जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे।

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7 मार्च, 2017: मध्य प्रदेश के जबरी रेलवे स्टेशन के पास भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में बम फटा था, जिसमें 10 लोग घायल हुए थे।

21 जनवरी 2017: कुनेरू के पास जगदलपुर-भुवनेश्वर हीराखंड एक्सप्रेस पटरी से उतरी गई थी जिसमें 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 68 घायल हुए थे।

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आंकड़ों पर गौर करें तो केंद्रीय रेलवे मंत्री सुरेश प्रभु के कार्यकाल में भारतीय रेल में डिरेलमेंट के मामलों में 30 फ़ीसद का इज़ाफ़ा हुआ है। पिछले 5 साल के आंकड़ों पर गौर करें तो 2012-13 में 69 हादसों में 49 डिरेलमेंट के मामले थे।

  • 2013-14 में 71 हादसों में 53 डिरेलमेंट के मामले।

 

  • 2014-15 में कुल 85 रेल हादसों में 63 डिरेलमेंट के मामले थे।

 

  • 2015-16 में 78 हादसों में 65 बार डिरेलमेंट हुआ।
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