Wednesday , October 17 2018

श्री श्री रवि शंकर जी

प्यार में कभी गिरना नहीं चाहिये, प्यार में आगे बढ़ना चाहिये: श्री श्री रविशंकर

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ज्ञान बोझ है यदि वह आपके भोलेपन को छीनता है।ज्ञान बोझ है यदि वह आपके जीवन में एकीकृत नही है।ज्ञान बोझ है यदि वह प्रसन्नता नही लाता।ज्ञान बोझ है यदि वह आपको यह विचार देता है की आप बुद्धिमान है। ज्ञान बोझ है यदि वह आपको स्वतंत्र नही करता।ज्ञान बोझ ...

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प्रेम कोई भावना नहीं है, यह आपका अस्तित्व है: श्री श्री रविशंकर

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मैं आपको बताता हूँ, आपके अन्दर एक परम आनंद का फव्वारा है, प्रसन्नता का झरना है। आपके मूल के भीतर सत्य, प्रकाश और प्रेम है, वहां कोई अपराध बोध नहीं है, वहां कोई डर नहीं है। मनोवैज्ञानिकों ने कभी इतनी गहराई में नहीं देखा। जिसे तुम चाहते हो उससे प्रेम ...

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कैसे हो भक्ति की ओर केन्द्रित,जिससे हो परमानंद की अनुभूति

sri sri ravi sankar

सम्पूर्ण जीवन में आनंद की खोज में लगे रहने से भी जब लाभ न मिले तो व्यक्ति को भक्ति की ओर केन्द्रित होना चाहिए। अपने पूरे जीवन काल में लोग छोटी छोटी चीजों को पाने की कामना करते हैं जैसे पदोन्नति, और अधिक से अधिक धन या संतोषजनक रिश्ता, लेकिन ...

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अपने-आप में भी तलाशें ईश्वरत्वः श्री श्री रविशंकर

ईश्वरत्व

एक विचार को विचार के रुप में ही देखें, एक भावना को भावना के रुप में ही देखे तब आप खुल जायेगें अपने आप में ईश्वरत्व को देख पायेंगे। देखना इन्हें अलग-अलग परिणाम देता है। जब आप नकारात्मकता को देखते हैं तो ये तुरंत समाप्त हो जाती है और जब ...

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ईश्वर वो शक्ति है जिसके कारण सब कुछ हो रहा

ईश्वर

तुम क्या कहोगे अगर एक लहर सागर के अस्तित्व पर सवाल करे? सागर है तभी तो लहर है। जिसके कारण तुम खड़े हो, तुम्हारा अस्तित्व है, तुम सोचते हो, समझते हो, साँस लेते हो, वही भगवान है। ईश्वर क्या है? ईश्वर आकाश में यां कैलाश पर्वत पर बैठा कोइ व्यक्ति ...

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वैराग्‍य से मिलेंगे संसार के सारे सुख

वैराग्य

वैराग्य का आना स्वाभाविक है। उम्र बढ़ने के साथ, तुम्हारा मन स्वतः ही छोटी-छोटी बातों में नहीं अटकता है। जैसे बचपन में तुम्हें लौलीपॉप से लगाव था, पर वह लगाव स्कूल या कॉलेज आने पर स्वतः ही छूट गया। बड़े होने पर भी दोस्त तो रहते हैं पर उनके साथ ...

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अपने तन, मन और आत्मा में सामंजस्य स्थापित करें

आत्मा

पहला कदम है सुदर्शन क्रिया सीखना, जो कि एक शक्तिशाली तकनीक है।  हमारे शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करने की और इन सबको सामंजस्य में लाने की।  यह हमें अपने संचित तनाव को प्राकृतिक और प्रभावपूर्ण रूप से निस्तार करने की क्षमता देती है। मौन का अभ्यास – मानसिक ...

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दोषारोपण का स्वागत करो 

दोषारोपण

कैसा लगता है जब कोई तुम पर दोषारोपण करता है? सामान्यत: जब कोई तुमको दोष देता है तुम बोझिल और खिन्न महसूस करते हो या दुखी हो जाते हो। तुम आहत होते हो क्योंकि तुम आरोपों का प्रतिरोध करते हो। बाहरी तौर पर तुम विरोध न भी करो परंतु अन्दर ...

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कैसे अपने बच्चों से अच्छा संवाद स्थापित करें

अच्छा संवाद

अपने बच्‍चों से कैसे अच्‍छा संवाद स्‍थपित करें, जो बच्चों पर, उनके व्यवहार पर और उनको प्रभावित करने वाले मुद्दों पर प्रकाश डालती है। बच्चो को समझने और  उनको उत्तर देने का तरीका, बच्चों का पालन दृढ़ता से, निष्पक्षता से, और मस्ती के साथ कैसे करे, यह सब कार्यशाला में ...

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विस्मय से जागरूकता आती है

विस्मय

विस्मय आध्यात्मिक उद्घाटन का आधार है। ये कितना अद्भुत है कि सृष्टि सर्वत्र आश्चर्यजनक वस्तुओं से भरी पड़ी है। लेकिन हम इन्हें अनदेखा कर देते हैं। तभी हम में जड़ता का उदय होने लगता है और साथ में सुस्ती आती है। तमस का कार्य शुरू हो जाता है, निष्क्रियता आने ...

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