Wednesday , February 22 2017

ओशो जी

प्रारब्‍ध को देखकर मृत्‍यु को पहचानें: अोशो

मृत्‍यु

मृत्‍यु को दो प्रकार से जाना जा सकता है। या तो प्रारब्‍ध को देखकर या फिर कुछ लक्षण और पूर्वाभास है जिन्‍हें देखकर जाना जा सकता है। उदाहरण के लिए, जब कोई व्‍यक्‍ति मरता है तो मरने के ठीक नौ महीने पहले कुछ न कुछ होता है। साधारणतया हम जागरूक ...

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आतंकवाद का एकमात्र निदान : अवचेतन की सफाई

आतंकवाद

आतंकवाद की घटना निश्चित रूप से उस सबसे जुड़ी है, जो समाज में हो रहा है। समाज बिखर रहा है। उसकी पुरानी व्यवस्था, अनुशासन, नैतिकता, धर्म सब कुछ गलत बुनियाद पर खड़ा मालूम होता है। लोगों की अंतरात्मा पर अब उसकी कोई पकड़ नहीं रही। आतंकवाद का मतलब इतना ही ...

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जीवन में संतोष की तलाश करो : ओशो

संतोष

वह व्यक्ति जो स्वस्थ, निर्भार, निर्बोझ, ताजा, युवा, कुंआरा अनुभव करता है, वही समझ पाएगा कि संतोष क्या है। अन्यथा तो तुम कभी न समझ पाओगे कि संतोष क्या होता है-यह केवल एक शब्द बना रहेगा। संतोष का अर्थ हैः जो कुछ है सुंदर है यह अनुभूति कि जो कुछ ...

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भावनाएं पत्थर नहीं होतीं

प्रेम

आदमी के व्यक्तित्व के तीन तल हैं: उसका शरीर विज्ञान, उसका शरीर, उसका मनोविज्ञान, उसका मन और उसका अंतरतम या शाश्वत आत्मा। प्रेम इन तीनों तलों पर हो सकता है लेकिन उसकी गुणवत्ताएं अलग होंगी। शरीर के तल पर वह मात्र कामुकता होती है। तुम भले ही उसे प्रेम कहो ...

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अंधेरा कितना भी हो उसकी चिंता मत करोः ओशो

अंधेरा

अंधेरा कितना ही हो, चिंता न करो। अंधेरे का कोई अस्तित्व ही नहीं होता। अंधेरा कम और ज्यादा थोड़े ही होता है; पुराना-नया थोड़े ही होता है। हजार साल पुराना अंधेरा भी, अभी दीया जलाओ और मिट जाएगा। और घड़ी भर पुराना अंधेरा भी, अभी दीया जलाओ और मिट जाएगा। ...

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मूर्ति पूजा का विज्ञान और रहस्य

मूर्तिपूजा

जिन लोगों ने भी मूर्ति विकसित की होगी, उन लोगों ने जीवन के परम रहस्य के प्रति सेतु बनाया था। मूर्तिपूजा शब्द सेल्फ कंट्राडिकटरी है। इसीलिए जो पूजा करता है वह हैरान होता है कि मूर्ति कहां? और जिसने कभी पूजा नहीं की वह कहता है कि इस पत्थर को ...

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सुखी रहने का सफल मंत्र

सफल मंत्र

सुखी रहने का सफल मंत्र बताते हुए ओशो जी कहते हैं दुख पर ध्यान दोगे तो हमेशा दुखी रहोगे, सुख पर ध्यान देना शुरू करो। दअसल, तुम जिस पर ध्यान देते हो वह चीज सक्रिय हो जाती है। ध्यान सबसे बड़ी कुंजी है। दुख को त्यागो। लगता है कि तुम ...

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जीवन को उत्सव बना लो-ओशो

जीवन

तुम जहां हो, वहीं से जीवन यात्रा शुरू करनी पड़ेगी। अब तुम बैठे मूलाधार में और सहस्रार की कल्पना करोगे, तो सब झूठ हो जाएगा। फिर इसमें दुखी होने का भी कारण नहीं, क्योंकि जो जहां है वहीं से यात्रा शुरू हो सकती है। इसमें चिंतित भी मत हो जाना कि ...

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सच्‍ची खुशी

ओशो की बातें

ओशो भारत के महान संतों में गिने जाते हैं। ओशो यथार्थ में जीने वाले व्‍यक्ति थे। उस दाैर में जब भारत धर्म  की बेडि़यों से जकड़ा था तो उस कालखंड में ओशो की बातें हमें धर्म से विमुख होने की बात सिखातीं थीं। दुख की बात है कि ओशो को भारत ...

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व्‍यक्‍ति‍त्‍व की पहचान

ओशो के वचन

आज के करीब 30 साल पहले जब भारत में शारीरिक खुलेपन पर बात नहीं होती थी, तब ओशो के वचन दुनिया के सामने नई रोशनी बनकर आए। भारत में तो इनका विरोध हुआ लेकिन दुनिया ने ओशो के वचन खुद में बसने दिए। दरअसल, यह ओशो के वचन सिर्फ शारीरिक खुलेपन ...

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