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‘वाइज’ महिलाओं को बना रहा कुशल, बेहतर नहीं, बेस्‍ट है च्‍वाइस  

महिलाओंनई दिल्ली। दो साल पहले बी.वी. राजू प्रौद्योगिकी संस्थान की छात्रा श्री चारविथा, वूमेन इन सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग (वाइज) परामर्श कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हैदराबाद स्थित माइक्रोसॉफ्ट के परिसर में गईं। इस कार्यक्रम का लाभ उठाते हुए प्रतिष्ठित नौकरी पाने का सपना देखते हुए उन्होंने खुद को एक नौसिखिया कोडर (सांकेतिक शब्द देने वाले) से एक प्रबुद्ध सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में रूपान्तरित कर लिया।

सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में प्रतिफल देने वाले करियर का पीछा करने के लिए महिला इंजीनियरों को अभिप्रेरित करने हेतु माइक्रोसॉफ्ट ने साल 2014 में वाइज शुरू किया था।

माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर के सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के समूह प्रबंधक चारूमथी श्रीनिवासन ने आईएएनएस से कहा, “हमने ऐसे साझेदारों के साथ काम किया है, जो विद्यार्थियों की मदद के लिए स्वेच्छा से एक मजबूत मंच प्रदान करने हेतु स्थानीय और क्षेत्रीय कॉलेजों से बात करते हैं। यह मंच उनकी तकनीकी क्षमता का पोषण करता है और उनके सॉफ्टवेयर कौशल को कार्यक्रम के अंत तक नौकरी लायक बना देता है।”

यह विचार माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के महिला इंजीनियरों के एक समूह से आया, जो प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सफल करियर बनाने के लिए इंजीनियरिंग की छात्राओं की मदद करना चाहता था।

श्रीनिवासन ने आगे कहा, “हमने वाइज सलाह कार्यक्रम का हमारा पहला बैच बी.वी. राजू प्रौद्योगिकी संस्थान के 10 विद्यार्थियों के साथ शुरू किया और उनमें से प्रत्येक ने दिलचस्प एप्लीकेशन का विकास किया। विद्यार्थियों ने एप के विचार से लेकर उसे बनाने तक का काम किया।”

पहले बैच की सफलता के बाद दूसरे बैच में केवल विद्यार्थियों के एप बनाना सिखाने पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया गया, बल्कि डीप-लर्निग (सघन ज्ञान) मॉड्यूल शुरू किया गया, जिसमें बड़े डाटा और मशीन लर्निग पर जोर दिया गया।

दूसरे बैच के विद्यार्थियों ने सजगता से समाधान के विकास की उनकी समझदारी का प्रदर्शन करते हुए नौ एप बनाए।

श्रीनिवासन ने कहा, “कॉलेज की प्रतिक्रिया भी अनुकूल थी। इस महीने के शुरू में हमारे तीसरे बैच के लिए हमने 35 विद्यार्थियों को शामिल किया है।”

कार्यक्रम में शामिल एक अन्य प्रतिभागी ललिता गाडे ने वाइज कार्यक्रम के हिस्से के रूप में अपने साथी विद्यार्थियों को एक स्कूल बस पर नजर रखने के लिए एप बनाने हेतु अभिप्रेरित किया, जिसे ‘ट्रेकयान’ कहा गया। वह उद्योग के लिए योग्य पेशेवर के रूप में अपने रूपांतरण का श्रेय माइक्रोसॉफ्ट के सलाहकारों को देती हैं।

एक अन्य छात्रा श्राव्या कनागर्ला ने कहा, “वाइज सलाहकारी समूह ने मुझको तकनीकी और सॉफ्टवेयर कौशल दोनों क्षेत्रों अमूल्य ज्ञान प्राप्त करने में मदद की। सत्र ने हमलोगों को गूगल प्ले स्टोर पर एप, वेलेटलॉग के विकास और प्रदर्शित करने की कला में माहिर बना दिया। मैंने प्रभावी ढंग से संप्रेषण करना, टीम के साथ सहयोग करना और कठिन परिस्थिति में भी खुद को संतुलित रखना सीखा है।”

संस्थागत साझीदारों में एक श्री विष्णु एजुकेशनल सोसायटी के उपाध्यक्ष रविचंद्रन राजगोपाल ने आईएएनएस से कहा, “जब हम बड़े संगठनों में उनके ज्ञान के उपयोग के उद्देश्य से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में महिलाओं के लिए प्रतिभा के साथ अल्पकालिक उद्योग सहयोग कार्यक्रम का संचालन करते हैं तो एक विद्यार्थी के लिए कठिन और चुनौतीपूर्ण होता है।”

राजगोपाल ने आगे कहा कि वास्तव में माइक्रोसॅफ्ट की महिला सलाहकार एक साथ आती हैं और छात्राओं को उनके करियर के अनुकूलन और कंपनी के एक उत्पाद के अनुरूप सोच बनाने की सलाह देती हैं, जो अनोखा और आकर्षक है।

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