भूखे रहकर भी देश को स्वर्ण दिला रही काशी की यह बेटी, ब्ल्यूबीसी में भारत को दिलाया पहला स्थान

REPORT- KASHI NATH SHUKLA/VARANASI

कहते हैं धर्म की नगरी में होने के साथ साथ प्रधानमंत्री का यह संसदीय क्षेत्र परंपरा संस्कृति सभ्यता की धरोहर है और इसके साथ ही शिक्षा और खेल जगत की एक नई परिभाषा कायम करता आधुनिकता के दौर में उभरता एक संपूर्ण क्षेत्र है यह बनारस।

बनारस के इस रस को और भी ज्यादा बढ़ाती है काशी की बेटियां जो अपने गुणों से न सिर्फ यहां की संस्कृति को जीवित रखती है बल्कि आधुनिकता के दौर में आगे बढ़कर इस शहर के साथ सा देश का नाम वैश्विक स्तर पर ले जा रही हैं।

काशी की बेटी

बनारस की रहने वाली एक बेटी दीपिका तिवारी देश के लिए मुक्केबाजी करती है और आज तक पिछले 5 सालों में दीपिका ने एक भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता नहीं हारी है। दीपिका को अपनी कैटेगरी में हर प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक ही हासिल हुआ है, पिछले 5 साल से मुक्केबाजी की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं खेलने वाली दीपिका की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है और इसके लिए वह सरकार के साथ-साथ कई लोगों के दरवाजे खटखटा चुकी है।

बनारस की रहने वाली इस बेटी ने प्रतिभा कूट-कूट कर भरी है पर हर बार उन्हें आर्थिक स्थिति के कारण दूसरों के आगे हाथ फैलाना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए लगने वाली मैच फीस भी देने की दीपिका की फिलहाल स्थिति नहीं है लेकिन इस विषम परिस्थितियों में भी वह लगातार मेहनत कर रही है और देश को स्वर्ण पदक दिलाकर विश्व में एक नया मुकाम हासिल कर रही है।

फिलीपींस में डब्ल्यूबीसी में भारत को पहला स्थान दिलाने में दीपिका की प्रमुख भूमिका रही है और आने वाले 16 नवंबर में अमेरिका के अटलांटा में आयोजित डब्ल्यू आई बी एफ प्रतियोगिता में बनारस की बेटी हिस्सा लेने जा रही है।

दीपिका पदक लाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से सही डाइट तक नहीं मिल पा रही है और इस बात कि अब चिंता सता रही है कि इसी कारण उसका यह सपना अधूरा रह जाए ।

बनारस किया मुक्केबाज बेटी सही खुराक ना मिलने से परेशान अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी संसदीय कार्यालय पर अपने कोच धर्मेंद्र चौहान के साथ पहुंची थी जहां उन्होंने उत्तर प्रदेश के खेल व सूचना राज्यमंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी को अपनी कहानी सुनाई और प्रधानमंत्री को संबोधित पत्र मंत्री को देते हुए कहा कि उसे खेल निदेशालय की ओर से आर्थिक मदद मिल जाएगी तो उसका जीवन आसान हो जाएगा।

दीपिका का कहना है कि उसे वह खुराक नहीं मिल पाती है जो अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज खिलाड़ी को मिलना चाहिए। हालांकि दीपिका ने बताया कि खेल राज्य मंत्री की तरफ से उन्हें मदद का पूरा आश्वासन मिला है और साथ ही यह भी कहा गया है कि सरकार की तरफ से जो भी हो सकेगा वह उनके खेल को बढ़ावा देने के लिए करेगी।

विशाल जनसमूह के बीच मनाया गया विश्व मूलनिवासी आदिवासी दिवस

दीपिका बताती है कि दिन भर में 8 घंटे की कड़ी मेहनत और एक भरपूर डाइट ही सही अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज को सफलता हासिल करवा सकती है। खुराक सही ना होने की वजह से वह अपनी 8 घंटे की ट्रेनिंग भी पूरी नहीं कर पाती है।

घर की स्थिति ऐसी है कि खाना हमेशा चिंता का विषय बन जाता है। इसके साथ ही कई और तरीके की परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है. दीपिका ने बताया कि वह पैसों की कमी की वजह से किसी अच्छे कोचिंग सेंटर में ट्रेनिंग नहीं ले पाती है और उनकी पिछले 3 साल की ट्रेनिंग भले ही मुंह कर दी गई हो.

पर उसके अलावा काफी चीजों को लेकर दूसरे के आगे हाथ फैलाना पड़ता है पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चित्रों में उनका चयन हो जाता है, पर वहां तक पहुंचने के लिए उनके पास पैसों की कमी हो जाती है।

गौरतलब है कि दीपिका आज तक हर प्रतियोगिता को जीत की आई है पर उनका यह रिकॉर्ड हो सकता है जल्द ही टूट जाए क्योंकि उनका कहना है कि जिस तरीके से डाइट उन्हें मिल रही है उसके बाद कोई भी मुक्केबाज प्रतियोगिताएं आए नहीं जीत सकता है।

=>
LIVE TV