ब्रिटेन को 26 साल बाद फिर मिलेगी महिला प्रधानमंत्री

ब्रिटेनलंदन। 26 साल बाद ब्रिटेन को फिर से महिला प्रधानमंत्री मिलने का रास्ता साफ हो गया है। गृह मंत्री थेरेसा मे और ऊर्जा मंत्री एंड्रिया लीडसम के बीच मुकाबला होगा। गुरुवार को दूसरे दौर के मतदान के साथ ही कानून मंत्री माइकल गोव की दावेदारी समाप्त हो गई। कंजरवेटिव पार्टी के 330 सांसदों में से 199 ने थेरेसा का और 84 ने लीडसम का समर्थन किया। गोव केवल 46 सांसदों के वोट का जुगाड़ कर सके।

अब कंजरवेटिव पार्टी के करीब डेढ़ लाख प्रतिनिधि नए नेता का चुनाव करेंगे। नौ सितंबर को नए नेता के नाम का एलान होगा। इससे पहले माग्ररेट थैचर चार मई 1979 से 10 नवंबर 1990 तक देश की प्रधानमंत्री रहीं थी।

ब्रिटेन के वर्तमान प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने यूरोपीय संघ की सदस्यता को लेकर 23 मई को हुए ऐतिहासिक जनमत संग्रह के बाद अक्टूबर तक अपना पद छोड़ने की घोषणा की थी। शुरुआत में उनका उत्तराधिकारी बनने की दौड़ में पांच नेता शामिल थे। लेकिन, पहले चरण के मतदान के बाद ही पेंशन मंत्री स्टीफन क्रैब और पूर्व विदेश मंत्री लियॉम फॉक्स दौड़ से बाहर हो गए थे।

ब्रिटेन में पीएम पद के लिए थेरेसा की दावेदारी मजबूत

ब्रिटेन के पीएम बनने की दौड़ में सबसे आगे चल रहीं गृह मंत्री थेरेसा की दावेदारी गुरुवार को और पुख्ता हो गई। भारतीय मूल की रोजगार मंत्री प्रीति पटेल ने उनके समर्थन का एलान किया है। प्रीति ने कहा कि थेरेसा के अनुभव के सामने अन्य दावेदार कहीं नहीं टिकते और ब्रिटिश लोगों की इच्छाओं को पूरा करने के लिए वे सबसे उपयुक्त हैं। 44 साल की प्रीति ने ब्रेक्जिट के समर्थन में जोर-शोर से अभियान चलाया था।

उन्होंने कहा कि उनका हमेशा से मानना रहा है कि यूरोपीय संघ (ईयू) के बाहर ब्रिटेन ज्यादा मजबूत, समृद्ध और सुरक्षित है। ब्रेक्जिट पर सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी के दो खेमों में बंटने की बात मानते हुए उन्होंने सभी से मतभेद खत्म कर थेरेसा के पक्ष में एकजुट होने की अपील भी की। नए नेता को ही 28 देशों के समूह ईयू से निकलने की दो साल लंबी जटिल प्रक्रिया की शुरुआत करनी है।

कोबरा बीयर्स के संस्थापक लॉर्ड करण बिल्मोरिया ने ईयू की सदस्यता को लेकर दोबारा जनमत संग्रह की मांग की है। हाउस ऑफ लॉर्ड में बहस के दौरान उन्होंने कहा कि संसद की मंजूरी के बिना ईयू से बाहर होने के लिए लिस्बन संधि के धारा 50 के तहत प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती। ऐसे में दोबारा जनमत संग्रह कराने के रास्ते में कोई कानूनी अड़चन नहीं है। हालांकि प्रधानमंत्री कैमरन पहले ही ऐसी संभावनाओं को खारिज कर चुके हैं। पिछले दिनों दोबारा जनमत संग्रह की मांग करने वाली उस ऑनलाइन याचिका पर चर्चा संसद ने भी की थी जिस पर 40 लाख से ज्यादा लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं।

 

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