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कभी क्रीज पर आंसू बहाने वाला बैट्समैन बन गया ‘द वॉल’

बल्लेबाजी के दम पर द्रविड़भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ का बुधवार को 44वां जन्मदिन है। द्रविड़ टीम इंडिया की ‘दीवार’ ‘द वॉल’ के नाम से भी मशहूर हैं। अपनी बल्लेबाजी के दम पर द्रविड़ ने टीम को कई अहम मौकों पर जीत दिलाई है।

राहुल द्रविड़ ने वर्ष 1996 में लॉर्ड्स के अपने पहले टेस्‍ट में 95 रन और नॉटिंघम के दूसरे टेस्‍ट में 84 रन बनाकर अपने टैलेंट का ट्रेलर दिखा दिया। साल 1997 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जोहान्सबर्ग में अपने करियर का पहला शतक जमाकर 148 रन की बेहतरीन पारी खेलते हुए भी उन्होंने पूरे क्रिकेट जगत में अपना लोहा मनवा दिया।

द्रविड़ ने छोटी उम्र मे क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। एक इंटरव्यू में द्रविड़ ने बताया है कि 13 साल की उम्र में खेल के दौरान आउट होने पर रोने लगे। द्रविड़ के मुताबिक, वह उनकी जिंदगी का सबसे शर्मनाक दिन था क्योंकि वह ड्रेसिंग रूम तक रोते हुए गये थे। बाद में द्रविड़ ने अपनी इमोशंस पर काबू रखना सीखा और इंटरनेशनल क्रिकेट में ऐसे बल्लेबाज का रुतबा हासिल किया, जो आउट होने पर सबसे कम रिऐक्ट करते थे।

इंटरनेशनल क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर के अलावा द्रविड़ ही दूसरे बल्लेबाज हैं, जिन्होंने टेस्ट और वनडे दोनों में 10,000 से ज्यादा रन बनाए हैं। द्रविड़ ने 12 वनडे सेंचुरी के साथ 344 मैचों 10,889 रन बनाए हैं और टेस्ट में 13,288 रनो के साथ 36 सेंचुरी और 63 हाफसेंचुरी हैं। 2004 में आईसीसी अवॉर्ड्स शुरू हुए थे, इसी साल द्रविड़ ने आईसीसी टेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर और प्लेयर ऑफ द ईयर की ट्रॉफी जीती।

 

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