Wednesday , September 20 2017

प्रेरक-प्रसंग : गौतम बुद्ध

प्रेरक-प्रसंगएक समय की बात है गौतम बुद्ध किसी गांव के रास्ते जा रहे थे। उन्हें देखकर गांव के कुछ लोग उनके पास आए, और उनकी वेशभूषा देख उनका उपहास और अपमान करने लगे।

तथागत ने कहा, ‘यदि आप लोगों की बात समाप्त हो गई हो तो मैं यहां से जाउं। मुझे दूसरे स्थान पर भी पहुंचना है। बुद्ध की बात सुनकर वह ग्रामीण हैरान थे। वह गौतम बुद्ध से बोले, हमने आपका इतना अपमान किया और आप दुःखी भी नहीं हुए।’

तब बुद्ध ने कहा, मुझे अपमान से दुःख नहीं होता और स्वागत से सुख भी नहीं होता है। इसीलिए मैं वहीं करूंगा जो मैंने पिछले गांव में किया था।

एक ग्रामीण ने पूछा, पूज्य आपने पिछले गांव में ऐसा क्या किया था। तब तथागत बोले, पिछले गांव में कुछ लोग फल-फूल, मिठाइयां लेकर आए थे। तब मैंने उनसे कहा था कि मेरा पेट भरा हुआ है। मुझे माफ करो। तब मैंने उन्हें वह फल वापिस लौटा दिए थे। इस तरह आपने मुझे अपशब्द भेंट किए तो मैं वापिस इन्हें आपको लौटाता हूं।

अर्थात 

यदि कोई आपको कुछ दे और आप उसे लौटा दें तो वह वस्तु, शब्द उसी के हो जाते हैं। गौतम बुद्ध ने भी यही किया।

इसलिए ध्यान रखें आपके विरोधी यदि आपसे कुछ अपशब्द बोलते हैं तो यदि आप स्वीकार नहीं करते हैं तो वह स्वयं ही उनके पास लौट जाते हैं।

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