ट्रंप ने सऊदी, यूएई को हथियार बेचने के लिए कांग्रेस की अनदेखी की

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, यूएई और जॉर्डन को 8.1 अरब डॉलर मूल्य का हथियार बेचने को मंजूरी प्रदान करने के लिए कांग्रेस की अनदेखी कर दी।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह कहते हुए कांग्रेस की अनदेखी की कि ईरान के साथ जारी तनाव से राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति पैदा हो गई है।

ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा करते हुए कहा कि वह मध्य-पूर्व में पहले से मौजूद अमेरिकी सेना की सुरक्षा बढ़ाने के लिए वहां करीब 1,500 अतिरिक्त सैन्यदल भेजने का आदेश देंगे।

न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस में सख्त रुख रखने वाले जो चाहते थे उसकी तुलना में नया घटनाक्रम कमतर ही है। यहीं नहीं, क्षेत्र के कमांडर भी इससे ज्यादा ही सोच रहे थे।

विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने एक बयान में कहा कि इस करार से ईरान के आक्रमण पर लगाम लगाया जा सकेगा और अमेरिका के सहयोगियों की साझेदारी में आत्मरक्षा क्षमता का निर्माण होगा।

उन्होंने कहा, “इस सौदे (हथियार) से हमारे सहयोगियों को मदद मिलेगी और मध्यपूर्व में स्थिरता आएगी। साथ ही, ये राष्ट्र इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को रोक पाएंगे और उससे अपनी सुरक्षा कर पाएंगे।”

उन्होंन यह बात तेहरान से बढ़ते तनाव के संदर्भ में कही।

कुछ डेमोक्रेट नेताओं ने ट्रंप पर कांग्रेस की अनदेखी का आरोप लगाया है क्योंकि कांग्रेस में हथियारों की बिक्री का सख्त विरोध होता।

डेमोक्रेट सीनेटर रॉबर्ट मेनेंदेज ने ट्रंप पर तानाशाह देशों को मदद प्रदान करने का आरोप लगाया है। वह विदेश संबंध समिति में हैं।

उन्होंने कहा, “वह (ट्रंप) एक बार फिर हमारी लंबी अवधि की राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों या मानवाधिकार को लेकर हमारे रुखों के संबंध में प्राथमिकता तय करने में विफल रहे।”

विदेश संबंधी समिति के अध्यक्ष जेम्स ई. रिच ने कहा कि वह इस कदम के लिए कानूनी और संबंधित पहलुओं का पुनरीक्षण व विश्लेषण कर रहे हैं।

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परंपरा के अनुसार, हथियारों के नए सौदे की सूचना प्रशासन को अवश्य कांग्रेस को देनी चाहिए ताकि कानून निर्माताओं को सौदे की समीक्षा करने का अवसर मिले और आपत्तिजन होने की स्थिति में वे इसे रोक सकें।

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