जापान के एक स्टोर में हुई रोबोट की पिटाई, असमंजस में पड़ गयी पुलिस …

जापान के एक मोबाइल स्टोर में काम करने वाले रोबोट क्लर्क की वहां आए एक 60 वर्षीय बुजुर्ग ने पिटाई कर दी। बुजुर्ग उस रोबोट के बदतमीजी भरे व्यवहार से नाराज था।

मोबाइल कंपनी ने इसकी शिकायत पुलिस से की। अब पुलिस यह निर्णय नहीं ले पा रही कि उस बुजुर्ग के खिलाफ किस कानून के तहत केस चलाए।

कंपनी का कहना है कि ये रोबोट कर्मचारी की तरह काम करते हैं इसलिए बुजुर्ग पर उनके कर्मचारी पर हमले का केस चलना चाहिए।
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लेकिन कानून में ऐसी कोई धारा नहीं जिसके तहत रोबोट पर हमले की कार्रवाई हो सके। सितंबर की इस घटना को लेकर पुलिस ने अब बुजुर्ग के खिलाफ कंपनी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का केस दर्ज किया है।

मोबाइल स्टोर की वीडियो फुटेज में किच्चिी इशिकावा नाम के बुजुर्ग को इस रोबोट पर जूते चलाते साफ देखा गया। इशिकावा का दावा है कि रोबोक्लर्क ने उनके साथ बदतमीजी की इसलिए नाराज होकर उन्होंने हमला किया।

द डेली डॉट साइट के अनुसार, इस घटना के बाद जापान में रोबोट की सुरक्षा पर कानून बनाने की मांग शुरू हो गई है। रोबोटिक विशेषज्ञों का दावा है कि नए तरह के ह्यूमैनॉयड रोबोट्स कई मामलों में बिल्कुल मनुष्यों की तरह काम करते हैं।
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ऐसे में इन्हें थर्ड एक्जिसटेंस (तीसरा जीव) मानकर इनके लिए अलग से कानूनी प्रावधान करने चाहिए। वे कहते हैं कि बदतमीजी इंसान करते है और यदि रोबोट ऐसा कर रहा है तो इसका मतलब है कि उसमें मानवीय संवेदनाएं हैं। इसलिए उसे इंसान मानते हुए कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।

2012 में मनोवैज्ञानिक पीटर कान ने इंसान के साथ समय बिताने पर रोबोट के व्यवहार में आने वाले बदलावों को जानने के लिए ह्यूमैनॉयड रोबोट रोबोवी पर सर्वे किया था। इसमें 90 बच्चों को रोबोवी के साथ समय बिताने को कहा गया।

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