जम्मू-कश्मीर पर लगी पाबंदियों पर केंद्र सरकार का बयान, कहा “लोगों की सलामती के लिए लिया ये फैसला”

जम्मू कश्मीर में ईद का त्यौहार ख़त्म होने के बाद फिर से पाबंदियों में ढील को हटा लिया गया है. केंद्र सरकार ने इसे लेकर कल अपना बयान जारी किया है. इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का कहना है कि कश्मीर में लगाई पाबंदियों के पीछे एक बड़ा कारण है और ये फैसला पूरी तरह से जायज है. सरकार का कहना है कि जम्मू कश्मीर के लोगों की जान की सलामती के लिए ये फैसला लिया गया है. जो भी समाज विरोधी ताकतें जम्मू कश्मीर में पनप रही हैं, उनको रोका जा सके. फिलहाल अगर सब कुछ ठीक रहा तो इन पाबंदियों में चरणबद्ध तरीके से ढील दी जाएगी.

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वहीं, श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर के प्रधान सचिव रोहित कंसल ने कहा कि कई जिलों में 15 अगस्त के ड्रेस रिहर्सल के बाद उम्मीद है कि सुरक्षा बंदोबस्त में कुछ ढील दी जा सकती है। उधर, गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी कश्मीर में चरणबद्ध तरीके से ढील देने की बात कही है।

उन्होंने कहा, कश्मीर घाटी से उड़ानों का संचालन सामान्य रूप से हो रहा है। करीब 1500 हल्के वाहनों और दूसरे वाहनों की रोजाना हाईवे पर आवाजाही हो रही है। 13,500 मरीजों का श्रीनगर के कई अस्पतालों में इलाज चल रहा है। रोजाना करीब 100 भारी वाहन एलपीजी सिलिंडर और दूसरी जरूरी वस्तुएं पहुंचा रहे हैं।

बता दें इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला की याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर में कर्फ्यू हटाने, फोन-इंटरनेट और न्यूज चैनल पर लगे प्रतिबंध हटाने को लेकर सवाल किया था। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि राज्य में प्रतिबंध कब तक जारी रहेंगे?

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9 अगस्त को बड़े पैमाने पर थी अशांति फैलाने की योजना

गृह मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि उपद्रवी तत्वों ने श्रीनगर के बाहरी इलाकों में 9 अगस्त को व्यापक स्तर पर अशांति फैलाने के लिए सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंके गए। इसके बावजूद सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां नहीं चलाईं। यह घटना श्रीनगर के सौरा इलाके में हुई थी। मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्वीट कर बताया कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर में एक भी गोली नहीं चली।

दिग्विजय बोले, पीओके समेत जम्मू-कश्मीर हो भारत का अभिन्न अंग

वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओक) समेत जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग होना चाहिए। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि कश्मीर में फिर शांति लौट आए।

जब उनसे कहा गया कि उनका तो विवादों से नाता रहा है तो दिग्विजय ने दार्शनिक अंदाज में कहा, जो सत्य बोलने वाले को पत्थर भी सहने के लिए तैयार रहना चाहिए। ईसा मसीह को सूली पर चढ़ा दिया गया था, पैगबंर मोहम्मद साहब को विरोध का सामना करना पड़ा था। महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी, अब्राहम लिंकन को गोली मार दी गई थी और मार्टिन लूथर किंग को भी गोली मार दी गई थी।

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