क्षय रोग की सूचना न देने पर रद्द होगा चिकित्सक का पंजीकरण

चिकित्सक का पंजीकरणहापुड़। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने यहां शुक्रवार को कहा कि टीबी जैसी जानलेवा बीमारी के समूल नाश के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित कार्यक्रमों को अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद अब निजी और सरकारी सभी चिकित्सकों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है कि किसी भी मरीज में टीबी के लक्षण पाए जाने पर वे उसका पूरा ब्योरा नि:क्षय नामक वेबसाइट पर डाले। ऐसा न करने पर चिकित्सक का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।

चिकित्सक का पंजीकरण खतरे में  

डॉ. सिंह ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में क्षयरोग के बारे में जानकारी देते हुए कहा, “टीबी जैसे जानलेवा रोग के समूल नाश के लिए एमसीआई अधिनियम 1956 के नियम 2002 के अनुसार किसी भी सरकारी संस्थान व निजी चिकित्सक द्वारा टीबी के रोगी की सूचना जिला क्षय रोग अधिकारी को देना है और सूचना नहीं देने पर संबंधित चिकित्सक के उपर दण्डनीय अपराध लागू होता है।”

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2001 में प्रदेश के अन्य तीन शहरों के साथ आरम्भ किए गए आरएनटीसीपी कार्यक्रम के बावजूद बच्चों में होने वाली टीबी, एमडीआर टीबी, एक्सडीआर टीबी, एड्स व मधुमेह के साथ होने वाली टीबी पर काबू पाने में पुन:रक्षित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही हैं। जबकि टीबी रोगी के लिए सभी जांच व दवाइयां नि:शुल्क दी जाती हैं।

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