इस तकनीकी का इस्तेमाल कर आसनी से पता चलेगा दिल और दिमाग का मूड

बदलते रुटीन के मुताबिक, हम में से ज्यादातर लोग फिटनेस ट्रेकर्स इस्तेमाल करने लगे हैं. या फिर ऐसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं जो फिजिकल एक्टिविटी को मोनिटर कर सकें. वैज्ञानिकों का मानना है इसी तरह की तकनीक के उपयोग से मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर नज़र रखना भी संभव हो सकता है.

मूड का पूर्वानूमान मस्तिष्क और शरीर के बीच का कनेक्शन का पता लगाने में इस्तेमाल किया जा सकता है. रिसर्चस बताते हैं मस्तिष्क में आए बदलाव ही सेडनेस और घबराहट की वजह बनता है. फिर यही हमारे शरीर को प्रभावित करते हैं.

भावनात्मक बायोमार्कर को जानने के लिए हर्ट रेट बेहतर माने जाते हैं. जब हम तनाव में होते हैं तो धड़कन तेज होती है. लेकिन शरीर और भी कई तरीकों से भावनात्मक संकट का जवाब देते हैं.

जैसे कि कम एक्टिव रहना और कम नींद आना डिप्रेशन में जाने की निशानियां हैं. वहीं तनाव में रहने से पसीना भी ज्यादा आता है. जिससे स्किन टेंपरेचर बढ़ता है. इस पूरी प्रक्रिया को हार्वर्ड के साइकॉलोजिस्ट Matthew Nock ने emotional arousal कहा है.

सैद्धांतिक रूप से, कोई भी ऐसा सेंसर जो पहना जा सकता हो और वह धड़कन, स्किन टेंपरेचर और एक्टिवनेस को ट्रैक करे. वह ट्रैकर मूड को ट्रैक करने में मददगार होगा. ये ट्रैकर स्मार्टफोन के इस्तेमाल जितना आसान होगा. मानसिक स्थिति की जानकारी भी बताएगा.

पेंसिल्वेनिया की यूनिवर्सिटी के रिसर्च साइंटिस्ट ने कहा कि हम टेक्नोलॉजी को कैसे इस्तेमाल करते हैं, इस बात से भी मेंटल स्टेटस का अनुमान लगाया जा सकता है.

इस डेटा का इस्तेमाल करने के लिए, निजी कंपनियां उपकरणों को विकसित करने के लिए काम कर रही हैं. जो न केवल हमारे बायोमार्कर का पता लगाएंगे बल्कि उनकी व्याख्या भी करेंगे.

पिछले साल जून में picard द्वारा लीड की जा रही टीम ने बताया था, एक कलाई सेंसर भी तनाव को इंगित कर सकता है. ये रिसर्च जर्नल ऑफ मेडिकल इंटरनेट रिसर्च में पब्लिश हुई थी.

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इस सेंसर का बताया आंकड़ा 80 प्रतिशत सटीक था. जब छात्र तनाव महसूस कर रहे थे, तो सेंसर ने सही तरीके से ट्रैक किया था.

मूड भांपने से जुड़ी रिसर्च पर काम करते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो ने आठ हफ्तों तक स्टडी की. इस स्टडी में उन्होंने bipolar disorder के नौ लोगों को लिया. जिसमें शोधकर्ताओं ने पाया फोन में परिवर्तन से अवसाद के पूर्वानुमानित लक्षण दिखाई देते हैं.

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