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अखिलेश के नेता ही नहीं डीएम भी दबंग, दी जान से मारने की धमकी

आजमगढ़ में दबंग डीएमआजमगढ़। विधानसभा चुनाव से पहले भले ही सीएम अखिलेश यादव जनता की नजरों में साफ़ छवि बनाने का अथक प्रयास कर रहे हैं। लेकिन वहीं ताजा मामले में एक बार फिर प्रदेश में दबंगई का नया चेहरा देखने को मिला। सपा मुखिया मुलायम सिंह के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में दबंग डीएम सुहास एल वाई की सरपरस्ती में सालों से धोखाधड़ी का खेल जारी है।

आजमगढ़ में दबंग डीएम

डीएम ऑफिस में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को दरकिनार करते हुए आधा दर्जन कर्मचारी गैरकानूनी रूप से कार्यालय का काम देख रहे थे। यहां इन लोगों ने करोड़ो का वारा न्यारा भी किया।

आरटीआई व सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत के बाद आजमगढ के डीएम ने छह कर्मचारियों को तो सेवा मुक्त कर दिया, लेकिन आरटीआई व सामाजिक कार्यकर्ताओं के सूचना मांगने पर दबंग डीएम ने इन्हें हवालात की हवा भी खिला दी।

इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि खुद डीएम और उनके कर्मचारी उनकी जान के दुश्मन बने गए हैं।

ख़बरों के मुताबिक़ डीएम ऑफिस में साल 1991 से 1995 के बीच छह कर्मचारियों सुदामा यादव, हरिदर्शन यादव, राधेश्याम श्रीवास्तव, सुभाष चन्द्र, रामाज्ञा राम और अजय श्रीवास्तव को अस्थाई तौर पर तैनात किया गया था। कुछ ही वर्ष बाद शासन ने इन कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी।

कर्मचारियों ने हाईकार्ट में अपील की लेकिन कोर्ट ने इनकी अपिल को खारिज कर दिया।  इसके कर्मचारियों ने बाद देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में भी अर्जी दाखिल की। लेकिन वहां भी इनकी अपील 2013 में खारिज कर दी गयी।

राहत न मिलने पर इन कर्मचारियों ने चुपचाप कार्यालय में कार्य करना जारी रखा। आरटीआई व सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत पर पहले तो डीएम ने हिलाहवाली की। बाद में मामला तूल पकड़ते देख छह कर्मचारियों को सेवा से मुक्त कर दिया।

डीएम सुहास एलवाई ने कलेक्ट्रेट के छह कर्मचारियों को भले ही सेवा मुक्त कर दिया हो लेकिन वर्षो से चल रहे इस भष्टाचार का खुलासा करने वाले आरटीआई व सामाजिक कार्यकर्ता अरूण सिंह ने जिलाधिकारी के दुरव्यवहार को लेकर उनके उपर गंभीर आरोप लगाये हैं।

अरूण ने दावा किया है कि इस मामले में चुप्पी साधने के लिए डीएम और उनके स्टेनो ने जेल भेजने,  एनकाउंटर कराने और दुर्घटना कराने तक की धमकी दी है।

उन्होंने आरोप लगाया है कि डीएम के कहने पर ही उन्हें साइवर अफेंस में कई घंटों तक थाने में बैठाये रखा गया।

इसके बाद भी जब वह पीछे नहीं हटे, तब जाकर डीएम ने इन छह कर्मचारियों पर कार्रवाई की। अरूण ने खुद पर प्रशासन से खतरे की आशंका भी जाहिर की है।

वही इस मामले डीएम ने अभिनज्ञता जाहिर करते हुए लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि वह प्रत्येक नागरिक का सम्मान करते हैं। ऐसा करने के बारे में कभी सपने में भी नहीं सोंच सकते।

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