स्कंदपुराण की ये सात बाते जिन्हें अपनाकर अपने जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन कर सकते है

lord-vishnu_5713d369d8910एजेंसी/ हिन्दू धर्म में स्कंदपुराण का महत्त्वपूर्ण स्थान है। जिसमे जीवन से जुडी कई बातो तथा समस्याओ का बहुत ही अच्छे ढंग से निवारण बताया गया है इस पुराण में धर्म-अधर्म की सभी बातों के बारे में ज्ञान दिया गया है। जिन्हें समझकर मनुष्य जीवन में सफलता पा सकता है। तो क्या आपने अपने जीवन स्कन्दपुराण के महत्वपूर्ण उपदेशो को अपनाया,यदि नहीं तो आइये हम आपको बताते है स्कन्द पुराण की ये सात बाते जिन्हें अपनाकर आप भी अपने जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन कर सकते है। 

1. न हो दुष्ट और हिंसक: क्रूरता का अभाव और हिंसा का त्याग। जो दूसरों को दुख पहुंचाता है और उनके साथ हिंसा करता है, वह हिंसक प्रवृत्ति का होता है। ऐसा इंसान किसी के भी साथ बुरा व्यवहार करने से कतराता नहीं है। हिंसक प्रवृत्ति के लोग दूसरों का ही नहीं बल्कि खुद का भी नुकसान करते हैं। इसलिए, हर मनुष्य को अहिंसा का पालन करना चाहिए। 

रखे अपने मन को वश में: जिस मनुष्य का मन वश में नहीं रहता, वह अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए कुछ भी कर सकता है। ऐसा मनुष्य किसी के भी साथ बुरा व्यवहार या हिंसा कर सकता है। कई बार उसकी इच्छाएं उसे अपराधी तक बना देती हैं। इसलिए, हमें अपने मन को हमेशा वश में रखना चाहिए। कभी भी अपनी इच्छाओं का खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए। 

3. सबसे साथ अच्छा और समान व्यवहार करना: दूसरों के साथ अच्छा और सभी के साथ समान           व्यवहार करना। कई लोगों के मन में असमानता का भाव होता है। वे अमीर-गरीब, छोटे-बड़े में भेद करते हैं और उनके साथ व्यवहार भी उसी तरह करते हैं। इस बात को शास्त्रों में बिल्कुल गलत बताया गया है। धर्म ग्रंथों के अनुसार जो मनुष्य दूसरों में भेद-भाव नहीं करता और सबके साथ समान व्यवहार करता है, वह जीवन में बहुत उन्नति करता है। ऐसे मनुष्य की सारी इच्छाएं पूरी होती है और सभी के लिए सम्मान का पात्र होता है।

4. कभी झूठ का सहारा नहीं लेना चहिये: जीवन में कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए,जीवन में सफलता पाने के लिए सत्य का गुण होना बहुत जरूरी है। जो मनुष्य हमेशा सच बोलता है और सच का साथ देता है, उस पर भगवान हमेशा प्रसन्न रहते हैं और उसकी हर इच्छा पूरी होती है। 

5. कभी छल-कपट नहीं करना चाहिए: जिस व्यक्ति के मन में दूसरों के लिए छल-कपट की भावना रहती है, वह दुष्ट स्वभाव का होता है।ऐसा मनुष्य किसी का भी बुरा करने से पहले कुछ नहीं सोचता और दूसरों को दुख देना वाला होता है।ऐसी भावनाओं को कभी मन में नहीं आने देना चाहिए।साथ इसे ग्रंथो में सबसे ख़राब बताया गया।

6. देव भक्ति: मनुष्य के लिए भगवान की पूजा-अर्चना करना, रोज उनका ध्यान करना बहुत जरूरी होता है। जो मनुष्य देव पूजा और भक्ति नहीं करता, वह नास्तिक स्वभाव का होता है। ऐसे मनुष्य पाप और पुण्य में कोई फर्क नहीं जानते और अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकता है। इसलिए, हर किसी को रोज अपना थोड़ा समय देव भक्ति और पूजा में देना चाहिए।

7. खुश रहना: हमेशा खुश रहने वाला व्यक्ति सभी को प्रिय होता है इसलिए हमेशा खुश रहने की कोशिश की जानी चाहिए।जो मन से स्वस्थ रहता है, वह शरीर से भी स्वस्थ ही रहता है। जो हमेशा हसंने-मुस्कुराने वाला होता है, वह अपनी सारी परेशानियों का सामना बहुत ही आसानी से कर लेता है। हर व्यक्ति को हर परिस्थिति में खुश रहना चाहिए और नकारात्मक भावों को खुद से दूर ही रखना चाहिए। 

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